Para Asian Games: पैरा तीरंदाज शीतल देवी ने दो घंटे में जीते दो गोल्ड मेडल
जापान के आइची-नागोया में चल रहे एशियाई पैरा खेलों के ऐतिहासिक मंच पर भारत के पैरा एथलीटों ने अपने अदम्य साहस, फौलादी संकल्प और अद्वितीय प्रतिभा के बल पर तिरंगे की शान को नई बुलंदियों पर पहुंचा दिया है। दुनिया भर में अपनी अनोखी तकनीक से सनसनी मचाने वाली भारत की भुजाहीन स्टार तीरंदाज शीतल देवी ने गुरुवार के दिन को पूरी तरह अपने नाम कर लिया। शीतल ने मात्र दो घंटे से भी कम समय के अंतराल में सटीक निशाने साधते हुए लगातार दो स्वर्ण पदक जीतकर 'गोल्डन डबल' का ऐतिहासिक कारनामा कर दिखाया। तीरंदाजी रेंज से लेकर एथलेटिक्स ट्रैक तक भारतीय सूरमाओं का दबदबा इस कदर हावी रहा कि भारत ने गुरुवार को ही अकेले 7 स्वर्ण सहित कुल 26 पदकों पर कब्जा जमाया। इस शानदार प्रदर्शन के साथ भारत की कुल पदक संख्या 88 के भव्य आंकड़े तक पहुंच गई है, जिसमें 21 स्वर्ण, 26 रजत और 41 कांस्य पदक शामिल हैं। भारतीय दल की इस ऐतिहासिक छलांग में एथलेटिक्स विंग 52 पदकों (18 स्वर्ण, 16 रजत और 18 कांस्य) के साथ अब तक का सबसे मजबूत और सफल स्तंभ साबित हुआ है।
दो घंटे में दो स्वर्णिम निशाने: शीतल देवी ने मिक्स्ड टीम के बाद व्यक्तिगत स्पर्धा में रचा इतिहास
विश्व नंबर एक और मौजूदा विश्व चैंपियन 19 वर्षीय शीतल देवी ने आइची-नागोया के आर्चरी ग्राउंड पर जब अपने पैरों और ठोड़ी के संतुलन से कमान संभाली, तो पूरा स्टेडियम सांसें थामकर देखता रह गया। शीतल ने दिन की पहली स्वर्णिम सफलता मिक्स्ड टीम कंपाउंड स्पर्धा में हासिल की, जहां उन्होंने अपने जोड़ीदार तोमन कुमार के साथ मिलकर शानदार तालमेल का प्रदर्शन किया। इस रोमांचक खिताबी मुकाबले में भारतीय जोड़ी ने इंडोनेशिया के स्टार खिलाड़ियों टियोडोरा आडिया फेरेली और केन स्वागुमिलांग की जोड़ी को 151-148 के अंतर से धूल चटाकर अपना स्वर्ण पदक बरकरार रखा। इस बड़ी जीत के ठीक बाद शीतल महिलाओं की व्यक्तिगत कंपाउंड ओपन स्पर्धा के फाइनल मुकाबले में उतरीं। उन्होंने अपनी निरंतरता और मानसिक दृढ़ता को बनाए रखते हुए सिंगापुर की शीर्ष तीरंदाज अलीम नूर सैयदिया को बेहद कड़े मुकाबले में 142-139 से मात दी और कुछ ही पलों के भीतर पोडियम पर दोबारा खड़े होकर अपना दूसरा व्यक्तिगत गोल्ड मेडल भारत की झोली में डाल दिया।
44 वर्षीय सुवर्णा राज ने चक्का फेंक में खोला स्वर्ण का खाता: शैलेश और धर्मराज ने बनाए नए खेल रिकॉर्ड
गुरुवार के दिन का आगाज भारत के लिए बेहद प्रेरणादायक रहा, जिसकी शुरुआत 44 वर्षीय वरिष्ठ व्हीलचेयर एथलीट सुवर्णा राज ने की। महिलाओं की एफ54 चक्का फेंक (डिस्कस थ्रो) स्पर्धा में सुवर्णा ने 15.66 मीटर की दूरी नापकर अपना सर्वश्रेष्ठ व्यक्तिगत प्रदर्शन दर्ज किया और देश को दिन का पहला गोल्ड मेडल दिलाया। इसके बाद पुरुषों की ऊंची कूद टी63 स्पर्धा में शैलेश कुमार ने हवा में जादुई छलांग लगाई और 1.89 मीटर की ऊंचाई पार कर नया गेम्स रिकॉर्ड स्थापित करते हुए सोने का तमगा जीता। ट्रैक इवेंट्स में भी भारतीय धावकों की रफ्तार के आगे प्रतिद्वंद्वी टिक नहीं सके। महिलाओं की 400 मीटर टी47 रेस में अंजनाबेन बुंबाडिया ने 59.97 सेकेंड में फिनिश लाइन पार कर पहला स्थान हासिल किया, जबकि पुरुषों की 400 मीटर टी47 दौड़ में दिलीप महादू गावित ने 48.27 सेकेंड की बिजली जैसी रफ्तार से दौड़ते हुए स्वर्ण पदक पर कब्जा किया। दिन का सबसे धमाकेदार समापन पुरुषों की लंबी कूद में हुआ, जहां धर्मराज सोलाईराज ने टी44/टी62/टी64 की संयुक्त श्रेणी में 7.15 मीटर की विशाल छलांग लगाकर नया एशियाई रिकॉर्ड बना दिया और अपना चैंपियन खिताब सफलतापूर्वक बरकरार रखा।
तीरंदाजी से लेकर बैडमिंटन और तैराकी तक: गुरुवार को 7 स्वर्ण, 9 रजत और 10 कांस्य पदकों की बारिश
नागोया में गुरुवार का दिन भारतीय खेल इतिहास के सबसे सफल दिनों में दर्ज हो गया, जहां एथलीटों ने कुल 26 पदक जीते। स्वर्ण पदकों के अलावा भारतीय खिलाड़ियों ने 9 रजत और 10 कांस्य पदकों पर भी अपना नाम लिखा। तीरंदाजी में स्वाति चौधरी ने दबाव भरे फाइनल में शानदार निशाना साधते हुए रजत पदक जीता। एथलेटिक्स ट्रैक एंड फील्ड में प्रीति पाल, मोहम्मद बासिल, अकीरा नंदन बोनाथू, जयंती बेहरा, टोक्यो पदक विजेता वरुण भाटी और तेजलबेन दामोर ने रजत पदक जीतकर भारत की टैली को ऊपर उठाया। बैडमिंटन कोर्ट पर मनीषा रामदास ने एकल में रजत अपने नाम किया, जबकि पैरा तैराकी में कपिल कुमार ने जलपरी जैसी चपलता दिखाते हुए सिल्वर मेडल जीता। कांस्य पदकों की सूची में बैडमिंटन के दिग्गज प्रमोद भगत व मनीषा रामदास की जोड़ी, पैरालंपिक स्वर्ण विजेता कृष्णा नागर व नित्या सिवन की जोड़ी और पूर्व प्रशासनिक अधिकारी सुहास एलवाई चमके। वहीं तैराकी में रवि बुडुगिना, स्वातिक पटेल, तेजस नंदनकुमार, एथलेटिक्स में राकेशभाई भट्ट, राहुल, रवन्नी वलसैननी तथा टेबल टेनिस में स्टार खिलाड़ी भाविना पटेल व शुभम वाधवा की जोड़ी ने कांस्य जीतकर देश को झूमने का अवसर दिया।
88 पदकों के साथ इतिहास रचने के करीब भारत: 100 पदकों के जादुई आंकड़े पर टिकी निगाहें
आइची-नागोया एशियाई पैरा खेलों में 88 पदकों का यह पड़ाव भारतीय खेलों के पुनर्जागरण का जीवंत प्रमाण है। 21 स्वर्ण पदकों के साथ भारत अब पदक तालिका में शीर्ष देशों की कतार में मजबूती से खड़ा है। खेल विशेषज्ञों का मानना है कि टारगेट ओलंपिक पोडियम स्कीम (TOPS) और आधुनिक खेल अकादमियों के सहयोग से पैरा एथलीटों की तकनीक, फिटनेस और मानसिक तैयारी वैश्विक स्तर की हो चुकी है। जिस तरह से शीतल देवी ने शारीरिक सीमाओं को धता बताकर विश्व मंच पर इतिहास रचा है और सुवर्णा राज ने 44 वर्ष की उम्र में पोडियम पर तिरंगा लहराया है, वह देश के करोड़ों युवाओं और विशेष रूप से दिव्यांगजनों के लिए सबसे बड़ी प्रेरणा बन चुका है। खेलों के आगामी दिनों में होने वाले मुकदमों को देखते हुए यह पूरी संभावना जताई जा रही है कि भारतीय दल इस बार न केवल अपने पिछले रिकॉर्ड को ध्वस्त करेगा, बल्कि 100 से अधिक पदक जीतकर नागोया की धरती पर नया कीर्तिमान स्थापित करेगा।