अनाहत सिंह ने रचा इतिहास: 8 बार की वर्ल्ड चैंपियन नूर एल शेरबिनी को सीधे गेमों में चटाई धूल
विश्व स्क्वाश सर्किट में भारत की 18 वर्षीय युवा सनसनी अनाहत सिंह ने खेल जगत को स्तब्ध करते हुए इतिहास रच दिया है। पीएसए गोल्ड शिकागो ओपन के मुख्य ड्रॉ मुकाबले में अनाहत ने वह कारनामा कर दिखाया है जिसकी कल्पना बड़े-बड़े दिग्गज भी नहीं कर पा रहे थे। भारतीय स्क्वाश स्टार ने किसी और को नहीं, बल्कि आठ बार की विश्व चैंपियन और अपनी आदर्श मिस्र की दिग्गज खिलाड़ी नूर एल शेरबिनी को लगातार तीन सीधे गेमों में 11-8, 11-8, 11-7 से एकतरफा शिकस्त देकर टूर्नामेंट के क्वार्टर फाइनल का टिकट पक्का कर लिया। दुनिया की नंबर तीन खिलाड़ी और शीर्ष वरीयता प्राप्त शेरबिनी के खिलाफ कोर्ट पर उतरीं विश्व नंबर 15 अनाहत ने मैच की पहली ही सर्विस से ऐसा आक्रामक और संयमित खेल दिखाया कि मिस्र की धुरंधर खिलाड़ी को पूरे मुकाबले में वापसी करने की तनिक भी मोहलत नहीं मिली। इस अभूतपूर्व जीत के साथ ही अंतरराष्ट्रीय खेल गलियारों में अनाहत सिंह के नाम की गूंज सुनाई देने लगी है।
पहली सर्विस से अंतिम शॉट तक दबदबा: कैसे 18 साल की अनाहत ने 8 बार की चैंपियन को किया चारों खाने चित
मैच की शुरुआत से ही अनाहत सिंह ने अपनी रणनीति को कोर्ट पर बखूबी उतारा। उन्होंने अपनी रैली की गति को शानदार ढंग से नियंत्रित किया और अनफोर्स्ड एरर्स यानी गैर-जरूरी गलतियों को शून्य के करीब रखा। शेरबिनी अपनी आक्रामक ड्रॉप शॉट्स और बैकहैंड वॉली के लिए पूरी दुनिया में जानी जाती हैं, लेकिन अनाहत ने कोर्ट के किनारों को बहुत खूबसूरती से ब्लॉक किया और मिस्र की खिलाड़ी को लय हासिल करने से लगातार रोके रखा। पहले गेम को 11-8 से जीतकर अनाहत ने मनोवैज्ञानिक बढ़त हासिल की, जिसके बाद शेरबिनी ने दूसरे गेम में अपनी पूरी ताकत झोंक दी। इसके बावजूद भारतीय किशोरी ने संयम नहीं खोया और लंबी रैलियों में धैर्य दिखाते हुए दूसरा गेम भी 11-8 से अपनी झोली में डाल लिया। तीसरे गेम में दबाव पूरी तरह विश्व नंबर 3 पर था, जहां अनाहत ने कोर्ट कवरेज की अपनी असाधारण गति का परिचय देते हुए 11-7 से गेम और मैच दोनों को सील कर दिया।
'मैच के बाद भी नहीं हुआ अपनी आंखों पर यकीन': भावुक अनाहत ने साझा की अपनी आदर्श के खिलाफ खेलने की दास्तान
मैच जीतने के बाद कोर्ट पर मौजूद दर्शकों की तालियों की गड़गड़ाहट के बीच अनाहत सिंह की आंखों में खुशी और हैरानी दोनों के भाव साफ झलक रहे थे। उन्होंने जीत के बाद खुलकर बात करते हुए स्वीकार किया कि पेशेवर स्क्वाश की दुनिया में कदम रखने के पहले दिन से ही वे शेरबिनी को अपना आदर्श मानती आई हैं और उनके पोस्टर देखकर बड़ी हुई हैं। अनाहत ने भावुक होते हुए कहा कि जब वे कोर्ट पर उतर रही थीं, तो भारत के राष्ट्रीय कोच उनके साथ थे और वे लगातार यह विश्वास दिला रहे थे कि मुकाबला किसी से भी हो, जीत संभव है। उन्होंने आगे कहा कि वे शेरबिनी का हर एक मैच देखते हुए बड़ी हुई हैं और दोनों के मेंटॉर व कोच भी एक ही हैं। अनाहत ने कहा कि वे शेरबिनी की महान खेल यात्रा का दिल से सम्मान करती हैं, लेकिन कोर्ट के भीतर सिर्फ तिरंगे के मान और अपनी श्रेष्ठ रणनीति पर ध्यान केंद्रित करना ही उनकी सफलता की चाबी बना।
सौरव घोषाल और ग्रेगोरी गॉलटियर का मिला मार्गदर्शन: जूनियर वर्ल्ड चैंपियनशिप से लेकर टॉप 20 का सफर
अनाहत सिंह की यह अप्रत्याशित छलांग रातों-रात नहीं आई है, बल्कि इसके पीछे वर्षों की कठोर साधना और विश्व स्तरीय कोचिंग का मजबूत आधार है। उन्हें पूर्व विश्व नंबर एक खिलाड़ी ग्रेगोरी गॉलटियर, भारतीय स्क्वाश के दिग्गज सौरव घोषाल और प्रख्यात कोच स्टीफन गालीफिर से कोचिंग मिली है। इन दिग्गजों के मार्गदर्शन ने अनाहत के बेसिक शॉट्स और कोर्ट पोजिशनिंग को अंतरराष्ट्रीय मानकों पर परिपक्व बनाया। इसी साल की शुरुआत में अनाहत ने वर्ल्ड जूनियर चैंपियनशिप का प्रतिष्ठित खिताब जीतकर अपने इरादे जाहिर कर दिए थे। इसके बाद एशियन गेम्स में भारतीय दल का प्रतिनिधित्व करते हुए उन्होंने रजत पदक जीतकर देश का गौरव बढ़ाया। वर्ष 2023 में पेशेवर पीएसए सर्किट में पर्दापण करने के बाद से वे लगातार कई पीएसए खिताब अपनी झोली में डाल चुकी हैं और स्क्वाश रैंकिंग के इतिहास में टॉप 20 में प्रवेश करने वाली सबसे युवा एशियाई महिला खिलाड़ी का रिकॉर्ड भी अपने नाम दर्ज करा चुकी हैं।
शिकागो ओपन में भारत की पदक उम्मीदें बुलंद: क्या खिताबी जीत की ओर बढ़ेंगी युवा अनाहत सिंह?
नूर एल शेरबिनी जैसी अपराजेय मानी जाने वाली चैंपियन को मात देकर बाहर करने के बाद अनाहत सिंह अब पीएसए गोल्ड शिकागो ओपन में खिताब की सबसे प्रबल और चर्चित दावेदार बन गई हैं। क्वार्टर फाइनल में पहुंचने के साथ ही उन्होंने यह साबित कर दिया है कि वे केवल जूनियर स्तर की प्रतिभा नहीं हैं, बल्कि सीनियर सर्किट में भी दुनिया की किसी भी महारथी को पटखनी देने का माद्दा रखती हैं। स्क्वाश विशेषज्ञों का मानना है कि अनाहत की फुर्ती, आक्रामक ड्राइव और दबाव के पलों में शांत रहने की क्षमता उन्हें आने वाले समय में विश्व स्क्वाश की अगली नंबर एक खिलाड़ी बनाने का दम रखती है। भारत की खेल प्रेमी जनता की नजरें अब शिकागो के ग्लास कोर्ट पर टिकी हैं, जहां अनाहत का अगला मुकाबला उन्हें टूर्नामेंट के सेमीफाइनल और खिताबी मुकाबले के और करीब ले जाएगा।