करवा चौथ से पहले सोने-चांदी में भारी गिरावट, सोना ₹2,000 टूटा तो चांदी ₹5,700 हुई सस्ती

करवा चौथ से पहले सोने-चांदी में भारी गिरावट, सोना ₹2,000 टूटा तो चांदी ₹5,700 हुई सस्ती

करवा चौथ, धनतेरस और दिवाली जैसे प्रमुख त्योहारों से ठीक पहले सर्राफा और वायदा बाजार से सोने-चांदी के खरीदारों के लिए बड़ी राहत भरी खबर सामने आई है। शादी-ब्याह और त्योहारी खरीदारी के चरम दौर में कीमती धातुओं के दामों में आज तेज गिरावट दर्ज की गई। मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) से लेकर देश भर के स्थानीय खुदरा सर्राफा बाजारों में दोनों धातुओं की कीमतों में अचानक आए इस करेक्शन ने ज्वैलर्स और ग्राहकों दोनों को हैरान कर दिया है। करवा चौथ पर पत्नी को सोने के आभूषण या चांदी के तोहफे देने की योजना बना रहे आम उपभोक्ताओं के लिए यह गिरावट किसी सौगात से कम नहीं मानी जा रही है, जिससे आगामी दिनों में रिटेल मार्केट में लिवाली तेज होने की पूरी संभावना है।

MCX और हाजिर बाजार में भाव धड़ाम: जानिए आज का ताजा रेट

घरेलू वायदा बाजार (MCX) पर आज ट्रेडिंग सत्र के दौरान सोने का वायदा भाव करीब ₹2,000 टूटकर ₹1,44,196 प्रति 10 ग्राम के स्तर पर आ गया। वहीं, दूसरी तरफ चांदी में इससे भी जोरदार बिकवाली देखी गई और चांदी का वायदा भाव सीधे ₹5,700 गिरकर ₹2,03,520 प्रति किलोग्राम पर आ गया। यदि सर्राफा हाजिर बाजार की बात करें तो टैक्स और स्थानीय शुल्कों से पहले 24 कैरेट शुद्ध सोने की कीमत फिसलकर ₹1,43,152 प्रति 10 ग्राम के करीब दर्ज की गई, जबकि हाजिर चांदी का भाव ₹2,00,748 प्रति किलो के आसपास पहुंच गया। उल्लेखनीय है कि अपने ऑल-टाइम हाई स्तर से सोना अब तक लगभग ₹48,900 और चांदी ₹2,16,500 से अधिक सस्ती हो चुकी है, जिससे निवेशकों और रिटेल खरीदारों के बीच दोबारा खरीदारी की उत्सुकता बढ़ गई है।

क्यों आई सोने-चांदी की कीमतों में अचानक यह बड़ी गिरावट?

कमोडिटी विशेषज्ञों और बाजार विश्लेषकों के अनुसार, सोने और चांदी की कीमतों में इस भारी गिरावट के पीछे कई अंतरराष्ट्रीय और वृहद-आर्थिक (Macroeconomic) कारण जिम्मेदार हैं। सबसे बड़ा कारण अमेरिकी फेडरल रिजर्व (US Fed) की आगामी मौद्रिक नीति बैठक को लेकर निवेशकों के बीच बढ़ती सतर्कता है। अमेरिकी मुद्रास्फीति और पर्सनल कंजम्पशन एक्सपेंडिचर (PCE) के आंकड़ों से पहले डॉलर इंडेक्स में मजबूती देखी जा रही है। मजबूत डॉलर और ब्याज दरों के लंबे समय तक उच्च स्तर पर बने रहने की संभावनाओं के चलते अंतरराष्ट्रीय बुलियन मार्केट में मुनाफावसूली का दौर शुरू हो गया, जिसका सीधा असर भारतीय घरेलू बाजार पर देखने को मिला। इसके अतिरिक्त, वैश्विक स्तर पर भू-राजनीतिक तनाव में तात्कालिक स्थिरता और कच्चे तेल के उतार-चढ़ाव ने भी सेफ-हेवन के रूप में सोने की मांग को थोड़ा धीमा किया है।

सर्राफा बाजारों में उमड़ी भीड़: करवा चौथ की खरीदारी ने पकड़ी रफ्तार

सोने में प्रति 10 ग्राम दो हजार और चांदी में पौने छह हजार रुपये प्रति किलो की गिरावट आते ही दिल्ली, मुंबई, लखनऊ, जयपुर, इंदौर और कोलकाता जैसे प्रमुख शहरों के सर्राफा बाजारों में हलचल तेज हो गई है। स्थानीय ज्वैलर्स का कहना है कि पिछले कुछ हफ्तों से रिकॉर्ड ऊंचाई के कारण ग्राहक केवल आवश्यक हल्की ज्वैलरी खरीद रहे थे या भाव गिरने का इंतजार कर रहे थे। अब जब करवा चौथ के ठीक पहले दामों में बड़ा गोता लगा है, तो पारंपरिक हार, कंगन, चेन, झुमके और चांदी के करवा व सिक्कों की प्री-बुकिंग और सीधी बिक्री में 25 से 30 फीसदी का उछाल देखने को मिल रहा है। व्यापारियों को उम्मीद है कि यह सुधारात्मक रुख धनतेरस तक बाजार में नकदी के प्रवाह को तेजी से बढ़ाएगा।

खरीदार और निवेशक अब क्या करें: एक्सपर्ट्स की क्या है राय?

बाजार के जानकारों का मानना है कि जो लोग शादी-विवाह या त्योहार के लिए आभूषण खरीदना चाहते हैं, उनके लिए मौजूदा गिरावट खरीदारी का बेहतरीन अवसर है। वहीं, लंबी अवधि के वित्तीय निवेशकों को सलाह दी जा रही है कि वे एकमुश्त बड़ी रकम लगाने के बजाय इस गिरावट के दौरान सिस्टेमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान (SIP) या गोल्ड ईटीएफ और सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड के जरिए धीरे-धीरे चरणबद्ध तरीके से निवेश करें। हालांकि, शॉर्ट-टर्म ट्रेडर्स को तकनीकी स्तरों पर नजर रखने की हिदायत दी गई है, क्योंकि फेडरल रिजर्व के फैसले और अंतरराष्ट्रीय आंकड़ों के आने तक बाजार में उतार-चढ़ाव का यह सिलसिला जारी रह सकता है। खुदरा खरीदारों को सलाह दी जाती है कि वे हॉलमार्क (HUID) देखकर ही सोने के जेवर खरीदें और बिल पर मेकिंग चार्ज व जीएसटी का मिलान अवश्य करें।