"मुझे नसीरुद्दीन शाह पर तरस आता है, वे हीन भावना के शिकार हैं", प्रोड्यूसर अशोक पंडित का दिग्गज अभिनेता पर तीखा हमला
हिंदी फिल्म उद्योग में सामाजिक और राजनीतिक मुद्दों को लेकर वैचारिक टकराव कोई नई बात नहीं है, लेकिन हाल ही में निर्माता-निर्देशक और 'इंडियन फिल्म एंड टेलीविजन डायरेक्टर्स एसोसिएशन' (IFTDA) के अध्यक्ष अशोक पंडित ने दिग्गज अभिनेता नसीरुद्दीन शाह के खिलाफ बेहद कड़ा और आक्रामक रुख अख्तियार किया है। देश के मौजूदा माहौल, सिनेमा की दिशा और राष्ट्रवादी फिल्मों को लेकर अक्सर अपनी राय जाहिर करने वाले नसीरुद्दीन शाह के बयानों पर पलटवार करते हुए अशोक पंडित ने कहा कि उन्हें नसीरुद्दीन शाह जैसे वरिष्ठ कलाकार की मौजूदा मानसिक स्थिति पर केवल तरस आता है।
अशोक पंडित का यह बयान सोशल मीडिया और राजनीतिक-सिनेमाई गलियारों में तेजी से वायरल हो रहा है। उन्होंने नसीरुद्दीन शाह की अभिनय क्षमता का सम्मान करते हुए भी उनके विचारों को पूरी तरह पूर्वाग्रह से ग्रसित, नकारात्मक और कुंठा से भरा करार दिया है।
"वे गंभीर हीन भावना से ग्रस्त हैं": अशोक पंडित का बड़ा बयान
एक हालिया साक्षात्कार के दौरान जब अशोक पंडित से नसीरुद्दीन शाह द्वारा समय-समय पर देश के सामाजिक सौहार्द और मुख्यधारा के सिनेमा पर उठाए जाने वाले सवालों के बारे में पूछा गया, तो उन्होंने बिना किसी हिचकिचाहट के जवाब दिया।
अशोक पंडित ने कहा, "नसीरुद्दीन शाह भारतीय सिनेमा के एक बेहतरीन और मंझे हुए अभिनेता रहे हैं, इसमें किसी को कोई संदेह नहीं हो सकता। लेकिन एक इंसान और नागरिक के तौर पर वे पिछले कुछ वर्षों से एक गहरी हीन भावना (Inferiority Complex) और कुंठा के शिकार हो चुके हैं। वे जब भी मुंह खोलते हैं, तो ऐसा लगता है कि उन्हें इस देश, इसके समाज और यहां की बहुसंख्यक आबादी से एक अजीब तरह की नफरत या शिकायत है।"
उन्होंने आगे जोड़ते हुए कहा कि नसीरुद्दीन शाह जैसे कद के कलाकार को समाज में सकारात्मकता और सौहार्द का संदेश देना चाहिए, लेकिन वे लगातार विक्टिम कार्ड खेलने और खुद को असुरक्षित दिखाने की कोशिश में लगे रहते हैं, जो बेहद दुर्भाग्यपूर्ण और हास्यास्पद है।
देश के माहौल और राष्ट्रवादी फिल्मों पर नसीर के बयानों पर आपत्ति
गौरतलब है कि नसीरुद्दीन शाह कई साक्षात्कारों में 'द कश्मीर फाइल्स', 'द केरल स्टोरी' जैसी यथार्थवादी और राष्ट्रवादी पृष्ठभूमि पर बनी फिल्मों को प्रोपेगैंडा बता चुके हैं और उन्होंने कई बार यह चिंता भी जताई है कि समाज में असहिष्णुता बढ़ रही है।
अशोक पंडित ने नसीर के इसी दृष्टिकोण को आड़े हाथों लेते हुए कहा:
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सच्चाई स्वीकार करने से परहेज: पंडित ने तर्क दिया कि जब सिनेमा में दशकों तक आतंकवाद और अलगाववाद की पीड़ा को नजरअंदाज किया गया, तब नसीर जैसे बुद्धिजीवियों ने कभी आवाज नहीं उठाई। लेकिन जब आज का सिनेमा कश्मीरी हिंदुओं या समाज के अनकहे दर्द को पर्दे पर ला रहा है, तो उन्हें इसमें प्रोपेगैंडा नजर आने लगता है।
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सदाबहार असंतोष: अशोक पंडित का कहना है कि नसीरुद्दीन शाह उस तथाकथित लिबरल जमात का प्रतिनिधित्व करते हैं, जिन्हें देश में हो रहे किसी भी सकारात्मक बदलाव, विकास या राष्ट्रीय गौरव से परेशानी होती है।
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सिनेमाई योगदान और वैचारिक टकराव: पंडित ने कहा कि जिस देश ने नसीरुद्दीन शाह को नाम, शोहरत, दौलत और पद्म पुरस्कारों से नवाजा, उसी देश की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर छवि धूमिल करने वाले बयान देना किसी भी नजरिए से सही नहीं ठहराया जा सकता।
सोशल मीडिया पर दो धड़ों में बंटे यूजर्स
अशोक पंडित के इस तीखे बयान के सामने आते ही इंटरनेट पर एक बार फिर पुरानी वैचारिक बहस छिड़ गई है:
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अशोक पंडित के समर्थक: राष्ट्रवादी विचारधारा से जुड़े उपयोगकर्ताओं और फिल्म प्रेमियों ने अशोक पंडित के रुख का पुरजोर समर्थन किया है। उनका कहना है कि नसीरुद्दीन शाह अक्सर चुनिंदा मुद्दों पर ही मुखर होते हैं और उनकी टिप्पणियां समाज में अविश्वास का माहौल पैदा करती हैं, इसलिए उन्हें आईना दिखाना जरूरी था।
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नसीरुद्दीन शाह के पैरोकार: वहीं, नसीरुद्दीन शाह के समर्थकों और सिनेमा प्रेमियों का तर्क है कि एक लोकतांत्रिक देश में हर नागरिक को अपनी असहमति और चिंता व्यक्त करने का संवैधानिक अधिकार है। नसीर केवल वही कह रहे हैं जो वे एक जागरूक नागरिक के तौर पर महसूस करते हैं और उनकी देशभक्ति पर सवाल उठाना गलत है।
खत्म होने का नाम नहीं ले रहा वैचारिक मतभेद
बॉलीवुड में पिछले कुछ वर्षों से निर्देशकों, निर्माताओं और कलाकारों के बीच वैचारिक ध्रुवीकरण काफी गहरा गया है। एक तरफ जहां मुख्यधारा का बड़ा वर्ग राष्ट्रवाद और ऐतिहासिक सच्चाइयों को केंद्र में रखकर फिल्में बना रहा है, वहीं दूसरी तरफ कुछ वरिष्ठ कलाकार इसे लेकर अपनी असहजता लगातार जाहिर करते रहे हैं। अशोक पंडित के इस हालिया हमले ने यह साफ कर दिया है कि सिनेमाई पर्दे के पीछे का यह वैचारिक द्वंद्व आने वाले दिनों में और अधिक तीखा होने वाला है।