बीमार आदमी, घटिया दिख रहे हो... शरीर ठीक करो': सेहत पर सवाल सुनते ही रिपोर्टर पर क्यों भड़क गए डोनाल्ड ट्रंप?

बीमार आदमी, घटिया दिख रहे हो... शरीर ठीक करो': सेहत पर सवाल सुनते ही रिपोर्टर पर क्यों भड़क गए डोनाल्ड ट्रंप?

अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव और आगामी मध्यावधि (मिडटर्म) चुनावों के गरमाए माहौल के बीच राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप एक बार फिर मीडिया पर अपने आक्रामक तेवर को लेकर विवादों के केंद्र में आ गए हैं। साउथ कैरोलिना के दौरे से लौटने के बाद जब पत्रकारों ने उनसे आगामी रैलियों को रद्द किए जाने और उनकी शारीरिक सेहत को लेकर सवाल पूछा, तो ट्रंप अपना आपा पूरी तरह खो बैठे। उन्होंने सवाल का सीधा जवाब देने के बजाय सवाल पूछने वाले अंतरराष्ट्रीय समाचार एजेंसी रॉयटर्स (Reuters) के वरिष्ठ व्हाइट हाउस संवाददाता जैकब बोगागे पर सीधे तीखे व्यक्तिगत और शारीरिक टिप्पणियों की बौछार कर दी। देखते ही देखते यह तीखी नोकझोंक सोशल मीडिया और अंतरराष्ट्रीय मीडिया की सबसे बड़ी सुर्खी बन गई।

कंसास और आयोवा की रैलियां अचानक क्यों हुईं रद्द?

इस पूरे विवाद की जड़ ट्रंप के चुनावी अभियान का अचानक बदला हुआ शेड्यूल है। मध्यावधि चुनावों में रिपब्लिकन पार्टी के उम्मीदवारों के समर्थन में ट्रंप ताबड़तोड़ चुनावी सभाएं कर रहे हैं। इसी कड़ी में कंसास के सेलिना में रिपब्लिकन सीनेटर रोजर मार्शल और आयोवा के डबुके में पार्टी उम्मीदवारों के समर्थन में ट्रंप की दो बड़ी रैलियां प्रस्तावित थीं। हालांकि, ऐन वक्त पर इन दोनों ही रैलियों को भौतिक रूप से रद्द कर दिया गया और घोषणा की गई कि ट्रंप व्यक्तिगत रूप से मौजूद रहने के बजाय केवल फोन यानी 'टेली-रैली' के जरिए मतदाताओं को संबोधित करेंगे। हफ्तों की लगातार भागदौड़, दर्जनों चुनावी सभाओं और हालिया भाषणों में ट्रंप की थकी हुई आवाज और बदले हुए लहजे को देखते हुए वॉशिंगटन के सियासी गलियारों में यह चर्चा तेज हो गई थी कि क्या 80 वर्ष के करीब पहुंच चुके राष्ट्रपति अत्यधिक थकान या किसी बीमारी से जूझ रहे हैं।

'तुम बीमार आदमी हो, तुम्हारा शरीर खराब है': कैमरे पर क्या हुआ पूरा वाकया?

प्रेस पूल में जब रॉयटर्स के पत्रकार जैकब बोगागे ने राष्ट्रपति से विनम्रतापूर्वक पूछा, "मिस्टर प्रेसिडेंट, क्या कंसास और आयोवा नहीं जाने का कारण लगातार यात्राओं के बाद आपकी तबीयत ठीक न होना है?" तो यह सुनते ही ट्रंप का चेहरा गुस्से से लाल हो गया। ट्रंप ने तुरंत पलटवार करते हुए कहा, "अरे, ऐसा सवाल पूछने वाले तुम खुद एक बीमार आदमी हो! तुम सच में बीमार हो।"

इसके बाद ट्रंप रुके नहीं, बल्कि उन्होंने पास खड़े अन्य पत्रकारों की ओर इशारा करते हुए रिपोर्टर का मजाक उड़ाना शुरू कर दिया। उन्होंने कहा, "इस आदमी को देखो, इसका शरीर पूरी तरह आउट ऑफ शेप है। यह मेरे पास आकर पूछता है कि सर, आप कंसास क्यों नहीं जा रहे? मैं कंसास इसलिए नहीं जा रहा क्योंकि रोजर मार्शल वहां बहुत बड़े अंतर से जीत रहे हैं और मुझे वहां जाने की कोई जरूरत महसूस नहीं होती। मैं कल फ्लोरिडा जा रहा हूं। तुम पिछले दो हफ्तों से मुझे लगातार कवर कर रहे हो, मैं पूरी तरह स्वस्थ महसूस कर रहा हूं। तुम बहुत घिनौने हो! जाओ, अपना शरीर ठीक करो, तुम बिल्कुल बदहाल और घटिया दिख रहे हो। रॉयटर्स वैसे भी बकवास है।' इतना कहकर ट्रंप वहां से आगे बढ़ गए।

सेहत और फिटनेस के मुद्दे पर इतने संवेदनशील क्यों रहते हैं डोनाल्ड ट्रंप?

डोनाल्ड ट्रंप अपने सार्वजनिक जीवन और राजनीतिक ब्रांडिंग में अपनी 'असीमित ऊर्जा' (High Energy) और फिटनेस को हमेशा एक मजबूत ढाल के रूप में पेश करते रहे हैं। वे अपने राजनीतिक विरोधियों पर अक्सर कमजोर, सुस्त और बीमार होने का ठप्पा लगाकर हमला बोलते आए हैं। ऐसे में जब कोई पत्रकार सीधे उनकी अपनी शारीरिक क्षमता, उम्र या बीमारी पर सवाल उठाता है, तो वे इसे केवल एक प्रशासनिक सवाल नहीं बल्कि अपनी राजनीतिक छवि पर सीधा हमला मानते हैं। इससे पहले भी जब चुनावी दौरों के दौरान उनके बोलने में लड़खड़ाहट या थकावट पर रिपोर्टिंग हुई थी, तब भी ट्रंप ने कड़ा ऐतराज जताया था। हालांकि, मिसिसिपी की एक हालिया रैली में उन्होंने खुद हल्के अंदाज में स्वीकार किया था कि भगवान ने इंसान के वोकल कॉर्ड्स (गले की नसें) ऐसे नहीं बनाए हैं कि कोई व्यक्ति रोजाना रैलियों में घंटों चिल्ला सके।

पत्रकार बिरादरी में रोष: जैकब बोगागे के समर्थन में उतरा मीडिया जगत

ट्रंप द्वारा एक सम्मानित पत्रकार को कैमरे के सामने इस तरह खुलेआम 'बॉडी-शेम' करने की घटना के बाद अमेरिकी मीडिया जगत में भारी नाराजगी देखी जा रही है। जैकब बोगागे, जो पहले 'द वॉशिंगटन पोस्ट' में व्हाइट हाउस और कांग्रेस कवर कर चुके हैं और वर्तमान में रॉयटर्स के लिए अमेरिकी आर्थिक नीतियों और राष्ट्रपति प्रशासन को कवर करते हैं, उनके समर्थन में तमाम प्रमुख मीडिया संस्थानों के पत्रकार आगे आए हैं। ब्लूमबर्ग और न्यूयॉर्क टाइम्स के पत्रकारों ने बोगागे को एक बेहद पेशेवर और निष्पक्ष रिपोर्टर बताया। कई वरिष्ठ संपादकों ने बयान जारी कर कहा कि देश के शीर्ष नेता से उनकी कार्यप्रणाली और स्वास्थ्य पर सवाल पूछना किसी भी स्वतंत्र पत्रकार का लोकतांत्रिक अधिकार और कर्तव्य है, और इसके जवाब में व्यक्तिगत रूप-रंग पर हमला करना पद की गरिमा के खिलाफ है।

मिडटर्म चुनावों के मुहाने पर इस विवाद के क्या हैं राजनीतिक मायने?

मध्यावधि चुनावों के अंतिम चरण में ट्रंप का यह व्यवहार एक बड़ा राजनीतिक मुद्दा बन गया है। डेमोक्रेटिक पार्टी के नेताओं ने इस बयान को लपकते हुए कहा है कि ट्रंप सवालों के दबाव में अपना मानसिक संतुलन खो रहे हैं और अपनी घटती ऊर्जा को छिपाने के लिए बदजुबानी का सहारा ले रहे हैं। वहीं, ट्रंप के व्हाइट हाउस रैपिड रिस्पांस टीम और उनके समर्थकों ने इस पूरे वीडियो को सोशल मीडिया पर यह कहकर साझा किया कि राष्ट्रपति किसी भी पक्षपाती मीडिया संस्थान और 'फर्जी नैरेटिव' को बर्दाश्त नहीं करते। आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि क्या इस जुबानी जंग का असर मतदाताओं के मूड पर पड़ता है या फिर ट्रंप का यह आक्रामक अंदाज उनके कोर वोट बैंक को और अधिक लामबंद करने में काम आता है।