'शूर्पणखा ही थी रामायण युद्ध की असली वजह', अपने किरदार पर बोलीं रकुल प्रीत सिंह; 'उसे लेकर समाज में कई गलतफहमियां'
नितेश तिवारी के निर्देशन में बन रही भव्य पौराणिक फिल्म 'रामायण' (Ramayana) इन दिनों भारतीय सिनेमा का सबसे चर्चित विषय बनी हुई है। जहां एक तरफ रणबीर कपूर (भगवान राम), साई पल्लवी (माता सीता) और यश (रावण) के किरदारों को लेकर दर्शकों में जबरदस्त क्रेज है, वहीं दूसरी ओर फिल्म के सहायक लेकिन सबसे निर्णायक पात्रों को लेकर भी चर्चाएं तेज हैं। इसी कड़ी में बॉलीवुड अभिनेत्री रकुल प्रीत सिंह द्वारा महाकाव्य के सबसे विवादास्पद और महत्वपूर्ण चरित्र 'शूर्पणखा' को निभाए जाने की खबरों के बीच उनका एक दिलचस्प बयान सामने आया है।
रकुल प्रीत सिंह ने पौराणिक संदर्भों और शूर्पणखा के व्यक्तित्व पर अपने विचार साझा करते हुए कहा कि रामायण के पूरे घटनाक्रम में शूर्पणखा महज एक खलनायिका नहीं थी, बल्कि वह उस पूरे महासंग्राम की सबसे बड़ी उत्प्रेरक (Catalyst) थी। अभिनेत्री का मानना है कि पारंपरिक कथाओं में इस चरित्र को जिस एकतरफा नजरिए से देखा गया है, उसके पीछे कई अनकही परतें और सामाजिक गलतफहमियां छिपी हुई हैं।
"युद्ध की असली धुरी थी शूर्पणखा": रकुल प्रीत ने समझाई किरदार की गहराई
एक हालिया बातचीत के दौरान रकुल प्रीत सिंह ने पौराणिक पात्रों के मनोवैज्ञानिक पक्ष पर चर्चा करते हुए कहा कि यदि निष्पक्ष होकर महाकाव्य का अध्ययन किया जाए, तो यह स्पष्ट होता है कि लंकापति रावण और प्रभु श्रीराम के बीच हुए धर्मयुद्ध की नींव शूर्पणखा के प्रसंग से ही पड़ी थी।
रकुल ने कहा, "हम अक्सर कहानी को सीधे राम और रावण के द्वंद्व के रूप में देखते हैं, लेकिन इस पूरी गाथा को उस अंतिम मोड़ तक पहुंचाने वाली कड़ी शूर्पणखा ही थी। अगर पंचवटी में वह घटना न घटती, तो शायद रावण कभी सीता हरण का दुस्साहस न करता और न ही वह ऐतिहासिक महायुद्ध होता। वह एक ऐसा चरित्र है जिसका प्रभाव पूरी कहानी की दिशा बदल देता है।"
शूर्पणखा को लेकर समाज में हैं कई गलतफहमियां
पारंपरिक चित्रण में शूर्पणखा को अक्सर केवल एक क्रूर, मायावी और कामुक राक्षसी के तौर पर पेश किया जाता रहा है। इस पर अपने विचार रखते हुए रकुल ने कहा कि इस किरदार को लेकर आम जनमानस में बहुत सी भ्रांतियां हैं।
उन्होंने स्पष्ट किया:
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भावनाओं और अस्वीकृति का द्वंद्व: शूर्पणखा एक ऐसी स्त्री थी जिसने अपनी भावनाएं खुलकर व्यक्त कीं, लेकिन उसके बदले में उसे शारीरिक विकृति और अपमान का सामना करना पड़ा। उसकी नाक-कान काटे जाने की घटना ने उसके भीतर प्रतिशोध की ऐसी आग जलाई जिसने दो महाशक्तियों को आमने-सामने ला खड़ा किया।
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एकतरफा खलनायिका नहीं: रकुल का मानना है कि हर पौराणिक चरित्र के अपने अंतर्द्वंद्व और पीड़ाएं होती हैं। शूर्पणखा के जीवन में अपने पति की मृत्यु, लंका के राजमहल में उसकी स्थिति और भाई रावण के साथ उसके जटिल रिश्ते जैसे कई पहलू हैं, जिन पर बहुत कम चर्चा होती है।
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अभिनय के लिहाज से चुनौतीपूर्ण: किसी ऐसे चरित्र को पर्दे पर जीवंत करना, जिसे सदियों से नकारात्मक दृष्टि से देखा गया हो, किसी भी कलाकार के लिए बेहद चुनौतीपूर्ण होता है क्योंकि इसमें आक्रोश, पीड़ा, अहंकार और लाचारी का अनोखा मिश्रण दिखाना पड़ता है।
नितेश तिवारी की 'रामायण' और किरदारों का नया दृष्टिकोण
हालांकि रकुल प्रीत सिंह ने फिल्म के आधिकारिक अनुबंधों के चलते सीधे तौर पर फिल्म की शूटिंग डिटेल्स साझा करने से परहेज किया, लेकिन सूत्रों का कहना है कि नितेश तिवारी अपनी 'रामायण' में हर किरदार को बहुत मानवीय और तार्किक आधार पर प्रस्तुत कर रहे हैं।
फिल्म में किसी भी पात्र को कार्टूनिश या लाउड दिखाने के बजाय उनके मनोवैज्ञानिक कारणों और ऐतिहासिक संदर्भों को गहराई से उभारा जाएगा। ऐसे में यदि रकुल प्रीत सिंह बड़े पर्दे पर शूर्पणखा के इस जटिल रूप को प्रस्तुत करती हैं, तो यह उनके अब तक के करियर का सबसे अलग और लीक से हटकर निभाया गया किरदार साबित हो सकता है। दर्शक भी यह देखने के लिए उत्सुक हैं कि आधुनिक सिनेमाई तकनीक और संवेदनशील लेखन के जरिए इस कालजयी गाथा के इन अहम पात्रों को किस भव्यता के साथ पेश किया जाता है।