शराब की पहली घूंट से लिवर सिरोसिस तक: कितने साल में पूरी तरह तबाह हो जाता है लिवर? गैस्ट्रोएंटेरोलॉजिस्ट से जानिए समय सीमा
नई दिल्ली: 'शराब सेहत के लिए हानिकारक है'—सिनेमा के पर्दों से लेकर शराब की बोतलों तक यह वैधानिक चेतावनी हर किसी की नजरों से गुजरती है, लेकिन अक्सर लोग इसे महज एक औपचारिकता मानकर नजरअंदाज कर देते हैं। शराब पीने वाले अधिकांश लोगों के मन में हमेशा यह गलतफहमी बनी रहती है कि लिवर खराब होने में दशकों का समय लगता है या फिर सिर्फ वही लोग लिवर की गंभीर बीमारी के शिकार होते हैं जो दिन-रात शराब के नशे में डूबे रहते हैं। मेडिकल साइंस और गैस्ट्रोएंटेरोलॉजिस्ट (पेट व लिवर रोग विशेषज्ञ) इस धारणा को पूरी तरह भ्रामक और खतरनाक बताते हैं। चिकित्सा अध्ययनों के अनुसार, शराब का असर हर व्यक्ति के शरीर, उसकी जीवनशैली, आनुवंशिकी और शराब की मात्रा के आधार पर अलग-अलग होता है। जहां कुछ लोगों में लिवर खराब होने में 10 से 20 साल का समय लग सकता है, वहीं अनियंत्रित और अत्यधिक शराब पीने (Binge Drinking) की आदत वाले व्यक्तियों में यह तबाही महज 2 से 5 साल के भीतर भी आ सकती है। लिवर हमारे शरीर की सबसे बड़ी केमिकल फैक्ट्री है, जो 500 से अधिक महत्वपूर्ण कार्य करता है। जब कोई व्यक्ति शराब पीता है, तो लिवर उसे शरीर से बाहर निकालने के लिए अत्यधिक दबाव में काम करता है, जिसके दौरान उत्पन्न होने वाले जहरीले तत्व लिवर की कोशिकाओं को धीरे-धीरे नष्ट करना शुरू कर देते हैं।
क्या पहली घूंट से ही शुरू हो जाती है लिवर की बर्बादी?
जब भी कोई व्यक्ति शराब का सेवन करता है, तो उसका लगभग 90 प्रतिशत हिस्सा पेट और आंतों से अवशोषित होकर सीधे लिवर में पहुंचता है। लिवर में मौजूद 'अल्कोहल डिहाइड्रोजनेज' (ADH) नामक एंजाइम शराब को तोड़कर 'एसिटाल्डिहाइड' (Acetaldehyde) नामक एक बेहद जहरीले और कैंसरकारी यौगिक में बदल देता है। इसके बाद लिवर इसे हानिरहित एसिटिक एसिड में बदलने की कोशिश करता है, लेकिन यदि शराब की मात्रा अधिक हो, तो यह जहरीला एसिटाल्डिहाइड लिवर की जीवित कोशिकाओं को जलाना और नष्ट करना शुरू कर देता है। यही कारण है कि डॉक्टरों के अनुसार, लिवर पर शराब का नकारात्मक प्रभाव पहली घूंट के साथ ही शुरू हो जाता है। यदि कोई व्यक्ति एक ही रात में जरूरत से ज्यादा शराब पी लेता है, तो कुछ ही घंटों के भीतर उसके लिवर में तीव्र सूजन आ सकती है। हालांकि लिवर के पास खुद को दोबारा जीवित करने (Regeneration) की असाधारण क्षमता होती है, लेकिन लगातार शराब पीते रहने पर उसे उबरने का समय नहीं मिलता और कोशिकाएं स्थाई रूप से मरने लगती हैं।
समय सीमा का सच: 5 से 20 साल का सफर और लिवर खराबी के तीन चरण
शराब से लिवर खराब होने की प्रक्रिया (Alcohol-Related Liver Disease - ARLD) अचानक नहीं होती, बल्कि यह मुख्य रूप से तीन गंभीर चरणों से होकर गुजरती है, जिसमें सालों का समय लग सकता है। पहला चरण है अल्कोहलिक फैटी लिवर (Steatosis), जो नियमित रूप से भारी शराब पीने वाले लगभग 90 से 100 प्रतिशत लोगों में विकसित हो जाता है। हैरानी की बात यह है कि रोजाना 40 से 50 ग्राम शराब पीने पर यह स्थिति मात्र कुछ हफ्तों से लेकर 2-3 साल के भीतर ही बन जाती है। इस चरण में लिवर की कोशिकाओं में अतिरिक्त वसा जमा होने लगती है। इसके कोई खास लक्षण नहीं होते और यह स्थिति शराब पूरी तरह छोड़ देने पर रिवर्स (पूरी तरह ठीक) हो सकती है। दूसरा चरण है अल्कोहलिक हेपेटाइटिस (Alcoholic Hepatitis), जो लगातार 5 से 10 साल तक अत्यधिक शराब का सेवन करने वाले लगभग 20 से 35 प्रतिशत लोगों में देखने को मिलता है। इस चरण में लिवर में गंभीर सूजन आ जाती है, कोशिकाएं फूल जाती हैं और काम करना बंद करने लगती हैं। कई बार भारी मात्रा में शराब पीने वाले युवा मरीजों में यह स्थिति अचानक जानलेवा एक्यूट लिवर फेलियर का रूप भी ले सकती है। तीसरा और सबसे घातक चरण है लिवर सिरोसिस (Liver Cirrhosis), जो आमतौर पर 10 से 20 साल तक अनियंत्रित और भारी शराब पीने का परिणाम होता है। हालांकि कमजोर लिवर वाले कुछ लोगों में यह 8 से 10 साल में भी हो सकता है। सिरोसिस में लिवर के स्वस्थ ऊतक पूरी तरह से कठोर स्कार टिश्यू (घाव के निशान) में बदल जाते हैं। लिवर सिकुड़ जाता है, उसका रक्त प्रवाह अवरुद्ध हो जाता है और यह स्थिति लाइलाज हो जाती है, जहां मरीज के पास लिवर ट्रांसप्लांट के अलावा कोई विकल्प नहीं बचता।
पुरुषों की तुलना में महिलाओं का लिवर क्यों होता है बहुत जल्दी खराब?
चिकित्सा अध्ययनों में यह सिद्ध हो चुका है कि शराब का सेवन महिलाओं के लिवर को पुरुषों की तुलना में दोगुनी तेजी से नुकसान पहुंचाता है। यदि एक पुरुष और एक महिला समान मात्रा में और समान अवधि तक शराब पीते हैं, तो महिला में लिवर डैमेज और सिरोसिस होने की संभावना कहीं अधिक तेजी से और कम उम्र में होती है। इसके पीछे दो मुख्य जैविक कारण हैं। पहला यह कि महिलाओं के पेट और लिवर में अल्कोहल को पचाने वाला एंजाइम (ADH) पुरुषों की तुलना में काफी कम मात्रा में बनता है, जिसके कारण शराब उनके खून और लिवर में ज्यादा समय तक बिना पचे बनी रहती है। दूसरा कारण यह है कि महिलाओं के शरीर में वसा (Fat) का प्रतिशत अधिक और पानी का प्रतिशत कम होता है। अल्कोहल पानी में घुलनशील होता है, इसलिए कम पानी होने के कारण महिलाओं के आंतरिक अंगों में अल्कोहल का सांद्रण (Concentration) काफी अधिक हो जाता है। यही वजह है कि जिन महिलाओं में रोजाना 20 ग्राम (लगभग एक या दो पेग) शराब पीने की आदत होती है, उनका लिवर 5 से 8 साल के भीतर गंभीर रूप से क्षतिग्रस्त हो सकता है।
जब शरीर देने लगे चेतावनी: लिवर डैमेज के खामोश और गंभीर लक्षण
लिवर को शरीर का 'साइलेंट वॉरियर' कहा जाता है क्योंकि जब तक यह 70 से 80 प्रतिशत तक बर्बाद नहीं हो जाता, तब तक यह दर्द का कोई बड़ा संकेत नहीं देता। इसी खामोशी के कारण लोग लंबे समय तक शराब पीते रहते हैं। हालांकि, सूक्ष्म स्तर पर शरीर कुछ शुरुआती चेतावनी संकेत अवश्य देता है, जैसे कि हमेशा बेवजह अत्यधिक थकान महसूस होना, भूख में अचानक कमी आना, पेट के ऊपरी दाहिने हिस्से में भारीपन या हल्का दर्द रहना, जी मिचलाना और सुबह के समय उल्टी जैसा महसूस होना। जब बीमारी सिरोसिस की ओर बढ़ती है, तब गंभीर और जानलेवा लक्षण सामने आने लगते हैं। इनमें आंखों और त्वचा का रंग गहरा पीला पड़ना (पीलिया या Jaundice), पेट में पानी भर जाने से पेट का फूलना (Ascites), पैरों और टखनों में सूजन (Edema), त्वचा पर मकड़ी के जाले जैसी लाल नसें दिखना (Spider Angiomas), उल्टी में खून आना और शरीर में विषाक्त पदार्थों के दिमाग तक पहुंचने से याददाश्त खोना या भ्रम की स्थिति (Hepatic Encephalopathy) पैदा होना शामिल हैं। इन लक्षणों का दिखना इस बात का प्रमाण है कि लिवर अब अंतिम सांसें ले रहा है।
शराब के अलावा ये खतरनाक आदतें लिवर को करती हैं तुरंत तबाह
यदि कोई व्यक्ति शराब का सेवन करता है और साथ ही उसकी जीवनशैली भी असंतुलित है, तो लिवर डैमेज होने की समय सीमा घटकर आधी रह जाती है। आज के दौर में शराब के साथ मोटापा (Obesity), टाइप-2 डायबिटीज और हाई कोलेस्ट्रॉल का मिश्रण लिवर के लिए 'टाइम बम' का काम कर रहा है। जिन लोगों को पहले से नॉन-अल्कोहलिक फैटी लिवर (NAFLD/MASLD) की समस्या है और वे ऊपर से शराब भी पीते हैं, उनमें फाइब्रोसिस बहुत तेजी से सिरोसिस में बदल जाता है। इसके अलावा, जो लोग हेपेटाइटिस-बी या हेपेटाइटिस-सी के वायरस से संक्रमित हैं, उनके लिए शराब सीधे तौर पर लिवर कैंसर (Hepatocellular Carcinoma) का कारण बन जाती है। भोजन में अत्यधिक जंक फूड, रिफाइंड शुगर, तेल-मसाले का उपयोग और शारीरिक निष्क्रियता लिवर की कोशिकाओं में टॉक्सिन्स को बाहर निकालने की क्षमता को पंगु बना देती है, जिससे 15 साल में होने वाला नुकसान महज 4 से 6 साल में हो जाता है।
क्या शराब छोड़ने के बाद लिवर खुद को दोबारा ठीक (Regenerate) कर सकता है?
मानव शरीर में लिवर ही एकमात्र ऐसा आंतरिक अंग है जो आंशिक रूप से नष्ट होने के बाद भी अपने नए ऊतक बनाने की क्षमता रखता है। यदि कोई व्यक्ति शुरुआती दो चरणों—यानी फैटी लिवर या हल्के हेपेटाइटिस के स्तर पर ही शराब को पूरी तरह 'ना' कह दे, तो लिवर 4 से 12 हफ्तों के भीतर खुद को काफी हद तक सामान्य कर लेता है और सूजन पूरी तरह खत्म हो जाती है। लेकिन अगर स्थिति लिवर सिरोसिस तक पहुंच चुकी है, तो स्कार टिश्यू को दोबारा स्वस्थ ऊतक में नहीं बदला जा सकता। हालांकि सिरोसिस के मरीज भी यदि तुरंत शराब पीना पूरी तरह बंद कर दें, तो बचे हुए स्वस्थ हिस्से को बचाया जा सकता है, जिससे उनकी उम्र कई वर्ष बढ़ सकती है। लिवर की कार्यप्रणाली की निगरानी के लिए नियमित रूप से लिवर फंक्शन टेस्ट (LFT) कराना, जिसमें SGOT, SGPT और बिलीरुबिन की जांच होती है, तथा पेट का अल्ट्रासाउंड या आधुनिक फाइब्रोस्कैन (FibroScan) टेस्ट कराना बेहद जरूरी है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों की दो टूक सलाह है कि सुरक्षित शराब जैसी कोई चीज नहीं होती; लिवर को दीर्घायु और सुरक्षित रखने का एकमात्र सबसे प्रभावी रास्ता शराब से पूर्ण परहेज ही है।