रिब रीमॉडलिंग सर्जरी का खौफनाक सच आया सामने, जानिए फेफड़ों और जान पर मंडराता बड़ा खतरा
खूबसूरती के अवास्तविक पैमानों और सोशल मीडिया पर परफेक्ट 'ऑवरग्लास फिगर' पाने की अंधी दौड़ ने आज कॉस्मेटिक सर्जरी की दुनिया में एक बेहद खतरनाक और रोंगटे खड़े कर देने वाले ट्रेंड को जन्म दे दिया है। पहले जहां सुडौल और पतली कमर (स्लिम वेस्ट) पाने के लिए महिलाएं महीनों जिम में भारी वर्कआउट करती थीं और संतुलित खानपान या स्ट्रिक्ट डाइट चार्ट का अनुशासन अपनाती थीं, वहीं अब इंस्टेंट और अस्वाभाविक बदलाव के लिए सीधे अपनी शारीरिक बनावट से घातक छेड़छाड़ की जा रही है। दुनिया भर में इन दिनों 'रिब रीमॉडलिंग' (Rib Remodeling Surgery) नाम की एक नई और बेहद जोखिम भरी कॉस्मेटिक प्रक्रिया का चलन तेजी से बढ़ रहा है। अपनी कमर का घेरा कुछ इंच कम दिखाने और सोशल मीडिया रील्स पर वायरल होने के लिए महिलाएं अपनी प्राकृतिक पसलियों को अंदर से तुड़वाने और मुड़वाने से भी परहेज नहीं कर रही हैं। यह प्रक्रिया सुनने में जितनी अमानवीय और डरावनी लगती है, इसका चिकित्सीय सच और सर्जरी के बाद का दर्द उससे भी कहीं अधिक भयावह है।
क्या है रिब रीमॉडलिंग सर्जरी: जानिए कैसे शरीर के भीतर तोड़ी और मोड़ी जाती हैं पसलियां
रिब रीमॉडलिंग एक ऐसी सर्जिकल प्रक्रिया है जिसका एकमात्र उद्देश्य महिला की प्राकृतिक कमर के घेरे को कृत्रिम रूप से छोटा करना है। हमारे शरीर के सीने के पिंजरे यानी रिब केज (Rib Cage) का मुख्य कार्य फेफड़े, हृदय, लिवर और तिल्ली जैसे जीवन रक्षक आंतरिक अंगों को बाहरी आघातों से सुरक्षित रखना होता है। लेकिन इस सर्जरी में इन महत्वपूर्ण सुरक्षात्मक हड्डियों के साथ खतरनाक खिलवाड़ किया जाता है। सर्जरी के दौरान मरीज को सबसे पहले जनरल एनेस्थीसिया देकर पूरी तरह बेहोश किया जाता है। इसके बाद पीठ या कमर के पार्श्व भाग में छोटे-छोटे सर्जिकल चीरे लगाए जाते हैं। विशेष सर्जिकल उपकरणों और अल्ट्रासोनिक टूल्स की सहायता से निचली दो पसलियों (11वीं और 12वीं पसली, जिन्हें फ्लोटिंग रिब्स कहा जाता है) की बाहरी कठोर परत को जानबूझकर कमजोर या फ्रैक्चर किया जाता है। इसके उपरांत सर्जन अपने हाथों और औजारों के दबाव से उन हड्डियों को अंदर की ओर मोड़ते हैं, जिससे शरीर का बाहरी ढांचा संकरा नजर आने लगे।
3 महीने तक रोजाना 23 घंटे का टॉर्चर: हड्डियों के जुड़ने तक पहनना पड़ता है मेडिकल कॉर्सेट
ऑपरेशन टेबल से बाहर आने के बाद मरीज के लिए जो जिंदगी शुरू होती है, वह किसी असहनीय यातना से कम नहीं होती। शरीर के अंदर जानबूझकर तोड़ी और मोड़ी गई पसलियों को उस नए अस्वाभाविक आकार में स्थायी रूप से जोड़ने (हील होने) के लिए मरीज को कम से कम तीन महीने तक एक कड़ा और असहज मेडिकल-ग्रेड कॉर्सेट पहनना अनिवार्य होता है। इस सख्त कॉर्सेट को दिन के 24 घंटों में से लगातार 23 घंटे तक कसकर बांधे रखना पड़ता है, मरीज इसे केवल नहाने या ड्रेसिंग बदलने के लिए ही कुछ मिनटों के लिए उतार सकता है। इसका सीधा मतलब यह है कि मरीज के शरीर के भीतर टूटी हुई हड्डियां उसी मुड़ी हुई अवस्था में अत्यधिक दबाव और असहनीय दर्द के बीच धीरे-धीरे जुड़ती हैं। इस पूरी हीलिंग प्रक्रिया के दौरान सामान्य रूप से उठना-बैठना, करवट लेना, गहरी सांस लेना या खांसना तक मरीज के लिए जानलेवा दर्द का सबब बन जाता है।
सोशल मीडिया और इन्फ्लुएंसर्स का मायाजाल: लाखों रुपये फूंककर जान दांव पर लगा रहीं युवतियां
इस जानलेवा ट्रेंड को हवा देने में इंस्टाग्राम, टिकटॉक और यूट्यूब जैसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर सक्रिय ब्यूटी इन्फ्लुएंसर्स की भूमिका सबसे बड़ी मानी जा रही है। कई विदेशी और भारतीय सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स खुलकर इस बात को स्वीकार कर रही हैं कि उन्होंने इस अवास्तविक शारीरिक ढांचे को पाने के लिए 13 लाख से लेकर 20 लाख रुपये तक पानी की तरह बहा दिए हैं। एक चर्चित इन्फ्लुएंसर ने अपने व्लॉग में दावा किया कि उसने यह सर्जरी इसलिए करवाई क्योंकि वह कमर का ऐसा संकरा और अति-पतला आकार चाहती थी जिसे दुनिया की किसी भी डाइट या कठिन से कठिन कार्डियो व एब्स एक्सरसाइज से कभी हासिल नहीं किया जा सकता था। सोशल मीडिया पर दिखाए जाने वाले इन एडिटेड और चमकदार वीडियोज से प्रभावित होकर कम उम्र की लड़कियां और कामकाजी महिलाएं यह समझे बिना क्लीनिक्स पहुंच रही हैं कि वे अपनी जिंदगी और शरीर के साथ कितना बड़ा जुआ खेल रही हैं।
न्यूमोथोरैक्स और हीमोथोरैक्स का जानलेवा जोखिम: फेफड़ों में हवा या खून भरने से जा सकती है जान
चिकित्सा विज्ञान के अनुसार कमर पतली करने की यह खतरनाक सर्जिकल तकनीक वर्ष 2022 में पेरू के एक प्लास्टिक सर्जन डॉ. राउल मेंजानेडो सिप्रियानी द्वारा ईजाद की गई थी। हालांकि अब तक दुनिया भर में करीब 5,000 से अधिक ऐसी प्रक्रियाएं की जा चुकी हैं, लेकिन स्वतंत्र चिकित्सा विशेषज्ञों और अंतरराष्ट्रीय थोरेसिक सर्जनों का स्पष्ट कहना है कि इसके दीर्घकालिक दुष्प्रभावों और जोखिमों का अभी तक कोई व्यापक वैज्ञानिक अध्ययन उपलब्ध नहीं है। पसलियों को मोड़ने या काटने के दौरान सबसे बड़ा और जानलेवा खतरा यह होता है कि जरा सी भी सर्जिकल चूक से पसली का नुकीला सिरा फेफड़ों की बाहरी झिल्ली (प्लुरा) को फाड़ सकता है। ऐसा होने पर फेफड़ों के चारों ओर हवा भर सकती है, जिसे मेडिकल भाषा में न्यूमोथोरैक्स (Pneumothorax) कहा जाता है। इसके अलावा खून की नसें फटने से फेफड़ों के कैविटी में खून जमा होने की स्थिति बन सकती है, जिसे हीमोथोरैक्स (Hemothorax) कहते हैं। ये दोनों ही स्थितियां मरीज के फेफड़े को पूरी तरह कोलैप्स कर सकती हैं और तुरंत आपातकालीन आईसीयू सपोर्ट न मिलने पर मिनटों में मरीज की मौत हो सकती है। इसके अतिरिक्त अगर हड्डियां गलत कोण पर जुड़ जाएं या खिसक जाएं, तो मरीज का शरीर हमेशा के लिए विकृत हो सकता है और वह जीवन भर के लिए पुराने असहनीय दर्द (क्रोनिक पेन) का शिकार हो सकता है।