भारत में तेजी से पैर पसार रहा कौन-सा कैंसर? शरीर के इन 7 शुरुआती संकेतों को भूलकर भी न करें नजरअंदाज
देशभर में गैर-संचारी रोगों (Non-Communicable Diseases) के आंकड़ों में कैंसर का ग्राफ बीते कुछ वर्षों में चिंताजनक गति से ऊपर चढ़ा है। भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद (ICMR) और नेशनल कैंसर रजिस्ट्री प्रोग्राम के विस्तृत अध्ययनों के अनुसार, भारत में कुल मामलों के आधार पर स्तन कैंसर (Breast Cancer) सबसे आम और सर्वाधिक दर्ज किया जाने वाला कैंसर बनकर उभरा है। यदि लैंगिक आधार पर इस वर्गीकरण को देखा जाए, तो पुरुषों और महिलाओं के बीच कैंसर के प्रकारों में स्पष्ट अंतर नजर आता है। महिलाओं में स्तन कैंसर के बाद गर्भाशय ग्रीवा यानी सर्वाइकल कैंसर (Cervical Cancer) दूसरा सबसे प्रमुख कारण बना हुआ है, जबकि पुरुषों में तंबाकू, खैनी, पान मसाला और धूम्रपान के व्यापक चलन के कारण मुंह का कैंसर (Oral Cavity Cancer) शीर्ष स्थान पर है, जिसके ठीक पीछे फेफड़ों का कैंसर (Lung Cancer) आता है। शहरी और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में जीवनशैली में आए बदलाव, खानपान में प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थों की अधिकता, शारीरिक निष्क्रियता और पर्यावरण प्रदूषण ने इस खतरे को और अधिक गहरा दिया है। सबसे गंभीर पहलू यह है कि भारत में कैंसर के लगभग 60 से 70 प्रतिशत मामले तीसरे या चौथे चरण (Advanced Stage) में जाकर डॉक्टरों के सामने आते हैं। इसका सबसे बड़ा कारण यह है कि अधिकांश लोग शुरुआती लक्षणों को सामान्य मौसमी संक्रमण, कमजोरी या उम्र का असर मानकर महीनों तक नजरअंदाज करते रहते हैं, जिससे बीमारी अनियंत्रित रूप से शरीर में फैल जाती है।
शरीर में दिखने वाले वे शुरुआती अलार्म जिन्हें बिल्कुल भी नजरअंदाज नहीं करना चाहिए
कैंसर की उत्पत्ति शरीर की कोशिकाओं के असामान्य और अनियंत्रित विभाजन से होती है, जो शुरुआत में बहुत सूक्ष्म संकेत भेजती है। यदि इन लक्षणों को दो से तीन सप्ताह के भीतर पहचान लिया जाए, तो इलाज की सफलता दर 90 प्रतिशत तक बढ़ जाती है। सबसे पहला और महत्वपूर्ण संकेत शरीर के किसी भी हिस्से में नई गांठ या उभार का उभरना है, जिसमें आमतौर पर शुरुआती दौर में कोई दर्द नहीं होता। महिलाओं में स्तनों, अंडरआर्म्स या कॉलरबोन के आसपास, और पुरुषों व महिलाओं दोनों में गर्दन, कमर या जांघों के जोड़ों में बिना दर्द वाली गांठ का धीरे-धीरे बढ़ना कैंसर का प्राथमिक संकेत हो सकता है। दूसरा प्रमुख संकेत मुंह के भीतर होने वाले ऐसे छाले (Ulcers) हैं जो सामान्य दवाओं या विटामिन सप्लीमेंट्स से दो से तीन हफ्तों के भीतर ठीक नहीं होते। मुंह के अंदर लाल (Erythroplakia) या सफेद (Leukoplakia) रंग के खुरदुरे पैच दिखना, जीभ की हलचल में रुकावट आना या मुंह खोलने की क्षमता धीरे-धीरे कम होना मुंह और गले के कैंसर के पुख्ता संकेत माने जाते हैं। तीसरा अत्यंत संवेदनशील संकेत बिना किसी प्रयास, डाइटिंग या कसरत के अचानक शरीर के वजन का तेजी से घटना (Unexplained Weight Loss) है। यदि कुछ ही हफ्तों के भीतर शरीर का 4 से 5 किलो या कुल वजन का 5 से 10 प्रतिशत हिस्सा बिना वजह घट जाए और साथ में अत्यधिक थकान महसूस हो, तो यह शरीर के अंदर सुलग रही किसी गंभीर बीमारी का प्रत्यक्ष संकेत है।
असामान्य रक्तस्राव और पाचन तंत्र में निरंतर आने वाले बदलाव
शरीर से किसी भी अस्वाभाविक मार्ग से होने वाला रक्तस्राव (Unusual Bleeding) कैंसर की सबसे गंभीर चेतावनी माना जाता है। महिलाओं में मासिक धर्म के तय चक्र के बीच में, शारीरिक संबंध बनाने के बाद या रजोनिवृत्ति (Menopause) हो जाने के वर्षों बाद होने वाला वेजाइनल ब्लीडिंग सर्वाइकल या एंडोमेट्रियल कैंसर का सीधा सूचक हो सकता है। इसी तरह खांसी या थूक के साथ खून का आना, पेशाब का रंग गहरा लाल या खूनी होना, अथवा शौच में काले रंग का मल आना या खून का रिसाव होना पाचन तंत्र, मूत्राशय या फेफड़ों के कैंसर की ओर इशारा करता है। कई बार लोग बवासीर (Piles) समझकर मल में आने वाले खून की अनदेखी करते हैं, जो बाद में कोलोरेक्टल (आंतों के) कैंसर के रूप में सामने आता है। पाचन और मलत्याग की आदतों में अचानक स्थायी बदलाव आना भी एक बड़ा लक्षण है। यदि किसी व्यक्ति को बिना किसी स्पष्ट खानपान की खराबी के लंबे समय तक लगातार दस्त या अत्यधिक कब्ज की शिकायत बनी रहे, पेट में हमेशा भारीपन और अफरा महसूस हो, या भोजन निगलते समय भोजन नली में दर्द और रुकावट का अहसास हो, तो इसे हल्के में नहीं लेना चाहिए। इसके अलावा तीन सप्ताह से अधिक समय तक बनी रहने वाली लगातार सूखी या बलगम वाली खांसी, जो एंटीबायोटिक दवाओं से भी ठीक न हो रही हो और जिसके साथ आवाज में अचानक भारीपन या खरखराहट (Hoarseness of Voice) आ गई हो, थायरॉइड, स्वरयंत्र (Larynx) या फेफड़ों के कैंसर का लक्षण हो सकती है।
शुरुआती जांच (स्क्रीनिंग) और नियमित आदतें ही हैं सबसे बड़ा जीवनरक्षक कवच
कैंसर के खिलाफ सबसे प्रभावी हथियार समय पर कराई जाने वाली मेडिकल स्क्रीनिंग और सतर्कता है। चिकित्सा विज्ञान का स्पष्ट निर्देश है कि 20 वर्ष की आयु के बाद प्रत्येक महिला को महीने में एक बार मासिक धर्म समाप्त होने के ठीक बाद स्वयं स्तन परीक्षण (Breast Self-Examination) अवश्य करना चाहिए, ताकि किसी भी नए बदलाव, गांठ या निप्पल से होने वाले असामान्य डिस्चार्ज को तुरंत पकड़ा जा सके। 40 वर्ष की आयु पूरी करने के बाद हर महिला को वर्ष में या डॉक्टर की सलाह के अनुसार दो वर्ष में एक बार मैमोग्राफी टेस्ट कराना चाहिए। इसी तरह 30 वर्ष की आयु के बाद हर महिला को नियमित अंतराल पर पैप स्मीयर (Pap Smear) और एचपीवी डीएनए टेस्ट कराना चाहिए, जिससे सर्वाइकल कैंसर के शुरुआती सेलुलर बदलावों को कैंसर बनने से कई साल पहले ही पकड़कर पूरी तरह ठीक किया जा सकता है। तंबाकू का किसी भी रूप में सेवन करने वाले व्यक्तियों को हर छह महीने में एक बार दंत चिकित्सक या ईएनटी विशेषज्ञ से ओरल कैविटी की पूरी जांच करानी चाहिए। शरीर पर मौजूद पुराने तिलों या मस्सों के आकार, किनारे और रंग में आने वाले किसी भी अचानक बदलाव (ABCD नियम - Asymmetry, Border, Color, Diameter) पर त्वचा रोग विशेषज्ञ से सलाह लेनी चाहिए। संतुलित आहार जिसमें फाइबर और एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर हरी सब्जियां और मौसमी फल शामिल हों, शराब और अल्ट्रा-प्रोसेस्ड मीट से दूरी, नियमित 30 मिनट का व्यायाम और स्वस्थ वजन बनाए रखना कैंसर के खतरे को 40 प्रतिशत तक प्राकृतिक रूप से घटा देता है। समय पर पहचान, तुरंत विशेषज्ञ चिकित्सक से संपर्क और नियमित स्क्रीनिंग ही कैंसर को हराने और एक स्वस्थ, सुरक्षित जीवन सुनिश्चित करने का एकमात्र वैज्ञानिक मार्ग है।