थल सेना प्रमुख जनरल धीरज सेठ ने दो आर्मी एविएशन स्क्वाड्रनों को सौंपी COAS फ्लाइट सेफ्टी ट्रॉफी
भारतीय थल सेना के जांबाज एविएटर्स ने देश की दुर्गम सीमाओं, बर्फीले पहाड़ों और कठिन भौगोलिक परिस्थितियों में अपनी असाधारण उड़ान दक्षता, अटूट अनुशासन और परिचालन सुरक्षा का लोहा एक बार फिर मनवाया है। राष्ट्रीय राजधानी नई दिल्ली में आयोजित हो रहे वर्ष 2026 के दूसरे सेना कमांडरों के सम्मेलन (Army Commanders' Conference) के गरिमामय मंच पर थल सेनाध्यक्ष (सीओएएस) जनरल धीरज सेठ ने सैन्य विमानन सुरक्षा में उत्कृष्ट और अनुकरणीय प्रदर्शन करने वाले दो प्रमुख आर्मी एविएशन स्क्वाड्रनों को प्रतिष्ठित 'सीओएएस फ्लाइट सेफ्टी ट्रॉफी' (COAS Flight Safety Trophy) प्रदान कर सम्मानित किया। दुर्गम अग्रिम मोर्चों पर शून्य दृश्यता, अत्यधिक ऊंचाई और प्रतिकूल मौसम के बीच लगातार जोखिम भरे सैन्य अभियानों को बिना किसी दुर्घटना के सफलतापूर्वक अंजाम देने के लिए यह सर्वोच्च सम्मान दिया जाता है। सेना के शीर्ष नेतृत्व की मौजूदगी में मिला यह सम्मान भारतीय सेना के एविएशन विंग की तकनीकी कुशलता, परिचालन अनुशासन और 'जीरो एक्सीडेंट' नीति के प्रति समर्पण का सबसे बड़ा प्रमाण बनकर उभरा है।
665 और 209 आर्मी एविएशन स्क्वाड्रन बने चैंपियन: सिंगल और ट्विन-इंजन श्रेणियों में मारी बाजी
भारतीय सेना द्वारा आयोजित इस प्रतिष्ठित वार्षिक मूल्यांकन में हेलीकॉप्टर इकाइयों को परिचालन जटिलता और तकनीकी बनावट के आधार पर दो अलग-अलग वर्गों—सिंगल-इंजन और ट्विन-इंजन श्रेणी—में परखा गया था। थल सेना के आधिकारिक प्रवक्ता ने जानकारी साझा करते हुए बताया कि सिंगल-इंजन श्रेणी में 665 आर्मी एविएशन स्क्वाड्रन (आरएंडओ - टोही एवं निगरानी) ने अपने बेजोड़ रिकॉर्ड और सुरक्षा मानकों के बूते पहला स्थान हासिल कर ट्रॉफी पर कब्जा जमाया। वहीं दूसरी ओर ट्विन-इंजन हेलीकॉप्टर श्रेणी में 209 आर्मी एविएशन स्क्वाड्रन (यूएच - यूटिलिटी हेलीकॉप्टर) ने अपनी सर्वोच्च तकनीकी तैयारी, सटीक रखरखाव और निर्बाध मिशन सफलता दर के आधार पर विजेता का गौरव प्राप्त किया। दोनों स्क्वाड्रनों के कमांडिंग अधिकारियों ने पूरी टीम की ओर से सेना प्रमुख के हाथों यह प्रतिष्ठित ट्रॉफी ग्रहण की, जिसे थल सेना के विमानन इतिहास में बेहद सम्मानजनक उपलब्धि माना जाता है।
बेहद सख्त पैमानों पर परखी जाती है फ्लाइट सेफ्टी: अनुशासन और पेशेवर मानकों का सर्वोच्च सम्मान
अतिरिक्त महानिदेशक (एडीजी - जनसूचना) ने इस अवसर पर स्पष्ट किया कि सीओएएस फ्लाइट सेफ्टी ट्रॉफी केवल एक खेल या साधारण प्रतियोगिता नहीं है, बल्कि यह युद्ध और शांति दोनों ही परिस्थितियों में सैन्य पायलटों और ग्राउंड क्रू द्वारा प्रदर्शित किए जाने वाले कठोर परिचालन अनुशासन की वार्षिक समीक्षा है। आर्मी एविएशन कोर के हेलीकॉप्टर्स सियाचिन ग्लेशियर, लद्दाख के बर्फीले दर्रों से लेकर पूर्वोत्तर के घने जंगलों और थार रेगिस्तान के रेतीले बवंडर तक लगातार उड़ान भरते हैं। ऐसे चुनौतीपूर्ण क्षेत्रों में सिंगल-इंजन और ट्विन-इंजन चॉपर्स को बिना किसी मानवीय चूक या यांत्रिक विफलता के उड़ाना असाधारण विशेषज्ञता की मांग करता है। इस ट्रॉफी के चयन में उड़ान के घंटे, सुरक्षित लैंडिंग रिकॉर्ड, मेंटेनेंस क्वालिटी, पायलट ट्रेनिंग और त्वरित सामरिक प्रतिक्रिया जैसे दर्जनों कड़े वैज्ञानिक और पेशेवर मानकों का महीनों तक गहन ऑडिट किया जाता है, जिसके बाद ही सर्वश्रेष्ठ स्क्वाड्रनों का चयन होता है।
नई दिल्ली में 2026 का दूसरा सेना कमांडरों का सम्मेलन: भविष्य के युद्ध और सुरक्षा परिदृश्य पर महामंथन
फ्लाइट सेफ्टी ट्रॉफी वितरण से पूर्व देश की राजधानी नई दिल्ली में भारतीय थल सेना का सर्वोच्च विचार-मंथन मंच यानी वर्ष 2026 का दूसरा सेना कमांडरों का सम्मेलन पूरे औपचारिक स्वरूप के साथ आरंभ हुआ। इस उच्चस्तरीय रणनीतिक सम्मेलन में थल सेनाध्यक्ष, उप-प्रमुख, सभी सातों सेना कमांडर और शीर्ष सैन्य अधिकारी एक छत के नीचे जुटे हैं। सम्मेलन के दौरान देश की उत्तरी सीमा (एलएसी) पर चीन के साथ जारी गतिरोध, पश्चिमी सीमा (एलओसी) पर सीमा पार से होने वाले घुसपैठ के प्रयासों और हिंद-प्रशांत क्षेत्र में उभरती नई सुरक्षा चुनौतियों का व्यापक भौगोलिक व सामरिक विश्लेषण किया जा रहा है। सैन्य नेतृत्व इस बात पर विशेष ध्यान केंद्रित कर रहा है कि कैसे आधुनिक युद्धक्षेत्र में पारंपरिक हथियारों के साथ-साथ आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, स्वायत्त ड्रोन स्वॉर्म्स, इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर और साइबर सुरक्षा तंत्र का तालमेल बिठाया जाए।
आत्मनिर्भरता और आधुनिक तकनीक से सेना को नई ताकत: एयर कैवेलरी की भूमिका पर जोर
आधुनिक युद्धकला में आर्मी एविएशन कोर थल सेना की 'तीसरी आंख' और तेज रफ्तार 'एयर कैवेलरी' के रूप में अपनी भूमिका को लगातार विस्तार दे रही है। सम्मेलन में यह रेखांकित किया गया कि स्वदेशी तकनीक से निर्मित हल्के लड़ाकू हेलीकॉप्टर (एलसीएच प्रचंड), एडवांस्ड लाइट हेलीकॉप्टर (एएलएच ध्रुव) और भविष्य के मानव रहित एरियल प्लेटफॉर्म्स को अग्रिम मोर्चों पर जिस तेजी से शामिल किया जा रहा है, उसके साथ-साथ कठोर उड़ान सुरक्षा संस्कृति को बनाए रखना पहली प्राथमिकता होनी चाहिए। सेना प्रमुख जनरल धीरज सेठ ने दोनों विजेता स्क्वाड्रनों के सभी अधिकारियों, तकनीकी इंजीनियरों और एविएशन क्रू की सराहना करते हुए कहा कि तकनीकी उत्कृष्टता और सुरक्षा अनुशासन का यह संतुलन ही भारतीय सेना को दुनिया की सबसे घातक, आधुनिक और भरोसेमंद सैन्य ताकतों में अग्रणी बनाए रखता है।