कश्मीर में घुसपैठ बढ़ाने की नापाक साजिश: पाकिस्तानी ISI के नए चीफ शमरेज खान ने तैनात की 'बॉर्डर एक्शन टीम'
जम्मू-कश्मीर में शांति, विकास और लोकतांत्रिक स्थिरता को अस्थिर करने के लिए सीमा पार पाकिस्तान से एक बार फिर बड़ा नापाक षड्यंत्र रचा जा रहा है। पाकिस्तान की कुख्यात खुफिया एजेंसी इंटर-सर्विसेज इंटेलिजेंस (ISI) की कमान संभालने के महज एक महीने के भीतर नए डायरेक्टर जनरल (डीजी) मेजर जनरल मुहम्मद शमरेज खान ने नियंत्रण रेखा (LoC) पर तनाव भड़काने और आतंकियों की बड़े पैमाने पर घुसपैठ कराने का आक्रामक प्लान तैयार किया है। पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (PoK) में बने लॉन्चपैड्स पर भारतीय सुरक्षा बलों की कड़ी चौकसी और सटीक जवाबी कार्रवाई के चलते लगातार मुंह की खा रहे आतंकी संगठनों को अब पाकिस्तानी सेना का सीधा बैकअप दिया जा रहा है। भारतीय खुफिया एजेंसियों और सुरक्षा तंत्र ने सीमा पार चल रही इस नापाक हलचल को भांपते हुए पूरे जम्मू-कश्मीर में नियंत्रण रेखा और अंतरराष्ट्रीय सीमा पर 'ऑपरेशन सिंदूर' और सघन गश्त के जरिए हाई अलर्ट घोषित कर दिया है।
नए ISI चीफ की खतरनाक रणनीति: 'बैट' के जरिए आतंकियों को भारतीय सीमा में धकेलने का प्लान
भारतीय खुफिया ब्यूरो (IB) के वरिष्ठ अधिकारियों से मिले इनपुट्स के अनुसार, मेजर जनरल मुहम्मद शमरेज खान को आईएसआई की जिम्मेदारी सौंपे जाने का मुख्य उद्देश्य ही यह था कि वे घाटी में घटते आतंकवाद को दोबारा हवा दें। गुलाम कश्मीर में पिछले कई महीनों से भारी बर्फबारी शुरू होने से पहले आतंकी आका अपने ट्रेंड आतंकियों को भारत में प्रवेश कराने की फिराक में हैं, लेकिन भारतीय सेना की एंटी-इन्फिल्ट्रेशन ऑब्सटैकल सिस्टम (AIOS) और थर्मल इमेजिंग ग्रिड ने उनकी हर कोशिश को नाकाम कर दिया है। इसी विफलता से बौखलाए पाकिस्तानी हुक्मरानों और सेना ने शमरेज खान को आगे किया है। अधिकारी बताते हैं कि खान ने कोई जल्दबाजी या उतावलापन दिखाने के बजाय पाकिस्तानी सेना की बर्बर 'बॉर्डर एक्शन टीम' (BAT) को पुनर्गठित और मजबूत करने की दिशा में ठोस जमीनी कदम उठाने शुरू किए हैं, ताकि भारतीय अग्रिम चौकियों को उलझाकर और घात लगाकर आतंकियों की घुसपैठ को आसान बनाया जा सके।
छोटी और घातक 'बैट' टीमों का नया मॉड्यूल: दो एसएसजी कमांडो और दो आतंकियों का खतरनाक कॉम्बिनेशन
आईएसआई और पाकिस्तानी सेना की संयुक्त रणनीति में इस बार एक बड़ा सामरिक बदलाव देखा गया है। सुरक्षा सूत्रों के अनुसार, पहले जहां 'बैट' (BAT) के दस्ते में 7 से 10 सदस्य हुआ करते थे, वहीं अब मेजर जनरल शमरेज खान ने इन दस्तों का आकार छोटा कर अधिकतम चार से पांच सदस्यों का करने का फैसला किया है। इस नए मॉड्यूल के तहत प्रत्येक यूनिट में पाकिस्तान के स्पेशल सर्विसेज ग्रुप (SSG) के दो ट्रेंड कमांडो और दो से तीन कुख्यात आतंकी संगठनों के फिदायीन लड़ाके शामिल किए जा रहे हैं। हालांकि इन छोटी टुकड़ियों की संख्यात्मक ताकत कम होगी, लेकिन मकसद ऐसी दर्जनों छोटी-छोटी यूनिट्स को नियंत्रण रेखा के अलग-अलग दुर्गम सेक्टरों—जैसे कुपवाड़ा, पुंछ, राजौरी और उरी—में एक साथ सक्रिय करना है। ऐसा इसलिए किया जा रहा है ताकि भारतीय सुरक्षा बलों को एक ही समय में कई जगहों पर उलझाया जा सके और घने जंगलों व नालों के जरिए आतंकियों की सुरक्षित एंट्री कराई जा सके।
17वीं इन्फैंट्री डिवीजन से आईएसआई तक: कौन हैं 'बैट' ऑपरेशंस के माहिर मेजर जनरल शमरेज खान?
मेजर जनरल मुहम्मद शमरेज खान पाकिस्तान सेना की 40 फील्ड रेजिमेंट के सीनियर अधिकारी हैं। उनके सैन्य करियर पर नजर डालें तो वे पारंपरिक खुफिया ऑपरेशनों के बजाय सीधे मैदानी और युद्धक अभियानों के विशेषज्ञ माने जाते हैं। आईएसआई प्रमुख की कुर्सी संभालने से ठीक पहले वे सिंध रेंजर्स का महानिदेशक के रूप में नेतृत्व कर रहे थे। इसके अलावा, साल 2023 में मेजर जनरल के पद पर पदोन्नति के बाद उन्होंने खरियान स्थित 17वीं इन्फैंट्री डिवीजन की कमान संभाली थी। सामरिक रूप से खरियान की 17वीं डिवीजन को नियंत्रण रेखा पर बैट ऑपरेशंस, कमांडो रेड्स और आतंकी लॉन्चिंग को संभालने का लंबा और पुराना अनुभव रहा है। यही वजह है कि पाकिस्तानी सेना ने किसी कोर इंटेलिजेंस अधिकारी के बजाय सीमा पर गुरिल्ला हमलों के रणनीतिकार को आईएसआई की कमान सौंपी है, ताकि कश्मीर में आतंकी नेटवर्क को एक बार फिर जिंदा किया जा सके।
आतंकी आकाओं संग गुप्त बैठकें: आसिम मुनीर के इशारे पर लश्कर, जैश और हिजबुल से साधा संपर्क
खुफिया सूत्रों का खुलासा है कि पिछले एक महीने के दौरान नए आईएसआई चीफ ने पाकिस्तानी सेना प्रमुख फील्ड मार्शल आसिम मुनीर के साथ लंबी रणनीति बैठकें की हैं। रावलपिंडी स्थित जीएचक्यू से हरी झंडी मिलने के बाद शमरेज खान ने मुजफ्फराबाद और रावलपिंडी के सेफ हाउसेज में प्रतिबंधित आतंकी संगठनों—लश्कर-ए-तैबा (LeT), जैश-ए-मोहम्मद (JeM) और हिजबुल मुजाहिदीन के शीर्ष कमांडरों के साथ कई गुप्त राउंड की वार्ताएं की हैं। इन बैठकों में आतंकियों को अत्याधुनिक एम4 कार्बाइन, स्नाइपर राइफल्स, नाइट विजन डिवाइस और एन्क्रिप्टेड कम्युनिकेशन सेट्स मुहैया कराने पर सहमति बनी है। पाकिस्तान का मुख्य उद्देश्य सर्दियों में बर्फ गिरने और दर्रे बंद होने से पहले ज्यादा से ज्यादा विदेशी आतंकियों को कश्मीर घाटी और पीर पंजाल के दक्षिणी इलाकों में उतारना है। हालांकि, भारतीय थलसेना, बीएसएफ और जम्मू-कश्मीर पुलिस के त्रिस्तरीय सुरक्षा घेरे ने सीमा पार के हर मंसूबे को भांपते हुए एलओसी पर जीरो टॉलरेंस की नीति के साथ जवाबी कार्रवाई की पूरी तैयारी कर रखी है।