शरद पूर्णिमा की रात धरती पर भ्रमण करती हैं मां लक्ष्मी
सनातन धर्म की गौरवशाली परंपरा में आश्विन मास की पूर्णिमा यानी शरद पूर्णिमा का स्थान अत्यंत पावन, अलौकिक और आध्यात्मिक ऊर्जा से परिपूर्ण माना जाता है। हिंदू पंचांग के अनुसार यह वही पावन तिथि है जब चंद्रमा अपनी संपूर्ण 16 कलाओं से युक्त होकर अमृतमयी किरणों की वर्षा करता है। इस पुण्य रात्रि को लोक परंपराओं में 'कोजागरी पूर्णिमा' या 'कौमुदी उत्सव' के नाम से भी श्रद्धापूर्वक पुकारा जाता है। धार्मिक और पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, शरद पूर्णिमा की मध्यरात्रि में धन, ऐश्वर्य और वैभव की अधिष्ठात्री देवी महालक्ष्मी स्वयं बैकुंठ धाम से उतरकर भूलोक पर विचरण करने आती हैं। देवी यह देखती हैं कि अंधकारमय रात्रि में कौन जागकर उनकी साधना, स्मरण और कीर्तन में लीन है। जो साधक इस रात जागकर सच्चे हृदय से भगवती की आराधना करते हैं, उनके जीवन से दरिद्रता का समूल नाश हो जाता है और घर-परिवार में सुख, शांति तथा अटूट समृद्धि का स्थायी वास होता है।
'को जागर्ति' से बना कोजागरी: रात भर जागरण कर मां लक्ष्मी की कृपा पाने का आध्यात्मिक रहस्य
धार्मिक ग्रंथों में कोजागरी शब्द की उत्पत्ति संस्कृत के 'को जागर्ति' वाक्य से मानी गई है, जिसका सरल अर्थ है—'कौन जाग रहा है?'। आध्यात्मिक विद्वानों और ज्योतिषविदों के अनुसार शरद पूर्णिमा की रात्रि केवल सामान्य रात नहीं, बल्कि एक दिव्य सिद्ध मुहूर्त होती है। इस रात्रि में मां लक्ष्मी उल्लूक वाहिनी बनकर पृथ्वी के हर नगर, ग्राम और गृह के आंगन में भ्रमण करती हैं। जो व्यक्ति इस रात्रि में आलस्य और निद्रा को त्यागकर मां लक्ष्मी के पावन नामों का जाप, श्रीसूक्त का पाठ और भजन-कीर्तन करते हैं, देवी उन पर अपनी अमृतमयी दृष्टि डालती हैं। शास्त्रों में उल्लेख मिलता है कि इस रात किया गया जागरण व्यक्ति के पूर्वजन्म के संचित पापों और आर्थिक अवरोधों को नष्ट करने में सक्षम होता है। रात्रि के सन्नाटे में ध्यान और मंत्रों का स्पंदन मानसिक शांति प्रदान करता है और पूरे परिवार में सकारात्मक ऊर्जा का संचार करता है।
अमृतमयी चांदनी में खीर और चंद्र दर्शन: आरोग्य के साथ 16 कलाओं का मिलता है वरदान
शरद पूर्णिमा की रात चंद्रमा पृथ्वी के सबसे निकट होता है, जिससे उसकी शीतल चांदनी में औषधीय और हीलिंग तत्व अत्यधिक प्रभावी हो जाते हैं। इस रात गाय के शुद्ध दूध, चावल और मिश्री से बनी खीर को खुले आसमान के नीचे या चांदी के बर्तन में रखने की परंपरा सदियों से चली आ रही है। मान्यता है कि चंद्रमा की रश्मियां खीर में औषधीय अमृत घोल देती हैं, जिसका सेवन करने से शरीर निरोगी बनता है और पित्त दोष शांत होता है। इसके साथ ही इस रात चंद्र देव के दर्शन कर तांबे या चांदी के लोटे से शुद्ध जल, कच्चा दूध और अक्षत मिलाकर अर्घ्य देने का विधान है। चंद्र दर्शन करते समय परिवार के सदस्यों के दीर्घायु, मानसिक संतुलन और यश की कामना की जाती है।
शरद पूर्णिमा की सरल और प्रामाणिक पूजा विधि: शाम की तैयारी से मध्यरात्रि की आरती तक
शरद पूर्णिमा के पावन अवसर पर मां लक्ष्मी का स्वागत करने के लिए घर के मुख्य द्वार और आंगन को विशेष रूप से शुद्ध करना चाहिए। शाम ढलते ही घर के पूजा स्थल को गंगाजल छिड़ककर पवित्र करें और फूलों व सुंदर दीपों से सजाएं। एक चौकी पर लाल या पीला वस्त्र बिछाकर मां लक्ष्मी और भगवान श्रीहरि विष्णु की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें। इसके बाद माता के सम्मुख गाय के शुद्ध घी का अखंड दीपक प्रज्वलित करें। देवी को लाल पुष्प, कमल का गट्टा, फल, इत्र, मखाना, सफेद मिष्ठान्न और विशेष रूप से तैयार खीर का नैवेद्य अर्पित करें। पूजा के दौरान मन को पूरी तरह शांत और एकाग्र रखते हुए मां लक्ष्मी के बीज मंत्र 'ॐ श्रीं महालक्ष्म्यै नमः' अथवा 'ॐ ह्रीं श्रीं कमले कमलालये प्रसीद प्रसीद श्रीं ह्रीं श्रीं ॐ महालक्ष्म्यै नमः' का कम से कम 108 बार कमलगट्टे की माला से जाप करें। इसके उपरांत लक्ष्मी चालीसा और कनकधारा स्तोत्र का भक्तिभाव से पाठ करें।
तिजोरी कभी खाली नहीं होगी: शरद पूर्णिमा पर धन वृद्धि और बरकत के अचूक उपाय
यदि जीवन में लंबे समय से आर्थिक तंगी, कर्ज का भारी बोझ या धन के अनपेक्षित अपव्यय की समस्या बनी हुई है, तो शरद पूर्णिमा की रात किए जाने वाले सात्विक उपाय अत्यंत फलदायी साबित होते हैं। इस रात मां लक्ष्मी को खीर का भोग अर्पित करने के बाद आधी रात को पांच पीली कौड़ियां और एक एकाक्षी नारियल देवी के चरणों में रखकर पूजन करें और अगली सुबह उन्हें लाल कपड़े में बांधकर अपनी तिजोरी या धन रखने के स्थान पर स्थापित कर दें। दूसरा, इस दिन निर्धन, असहाय और जरूरतमंद व्यक्तियों को अन्न, गर्म वस्त्र, दूध या सफेद वस्तुओं का गुप्त दान अवश्य करें। इस रात परिवार सहित यह संकल्प लें कि घर में कभी भी अन्न का अनादर नहीं होगा और धन का उपयोग सदैव न्यायसंगत व कल्याणकारी कार्यों में किया जाएगा। पूजा और जागरण के बाद प्रसाद रूपी अमृत खीर को परिवार के सभी सदस्यों में बांटें, जिससे परस्पर प्रेम और सौहार्द में अपार वृद्धि होती है।