दो पैन कार्ड केस में आजम खान और अब्दुल्ला आजम को हाईकोर्ट से बड़ी राहत सजा हुई सस्पेंड, जमानत मंजूर
समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता और पूर्व कैबिनेट मंत्री मोहम्मद आजम खान और उनके पूर्व विधायक बेटे अब्दुल्ला आजम खान को बहुचर्चित दो पैन कार्ड मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट से बड़ी कानूनी राहत मिली है। न्यायमूर्ति समित गोपाल की एकलपीठ ने निचली अदालत द्वारा दोनों को सुनाई गई सजा को अपील के अंतिम निस्तारण तक निलंबित (सस्पेंड) करते हुए उनकी जमानत अर्जी स्वीकार कर ली है। कोर्ट ने यह फैसला दोनों नेताओं द्वारा जेल में बिताई गई लंबी कानूनी हिरासत अवधि को आधार बनाते हुए सुनाया। हालांकि अदालत ने उनकी दोषसिद्धि (कन्विक्शन) पर रोक लगाने की मांग को खारिज कर दिया, जिसका सीधा असर उनके चुनावी भविष्य पर पड़ेगा। इस फैसले से लंबे समय से सीतापुर और हरदोई जेलों में बंद पिता-पुत्र के खेमे में राहत की सांस जरूर आई है।
क्या था दो पैन कार्ड का मामला और क्यों हुई थी सजा?
इस कानूनी विवाद की शुरुआत रामपुर के भाजपा नेता और वर्तमान विधायक आकाश सक्सेना द्वारा 6 दिसंबर 2019 को दर्ज कराई गई एक प्राथमिकी से हुई थी। शिकायत में आरोप लगाया गया था कि अब्दुल्ला आजम के पास दो अलग-अलग पैन कार्ड मौजूद हैं। पहले पैन कार्ड में उनकी जन्मतिथि 1 जनवरी 1993 दर्ज थी, जो उनके हाईस्कूल के शैक्षणिक प्रमाण पत्रों के अनुरूप थी। इस पैन कार्ड से उनका बैंक खाता संचालित होता था और आयकर रिटर्न दाखिल किया जाता था।
अभियोजन पक्ष का दावा था कि 2017 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में रामपुर की स्वार सीट से चुनाव लड़ने के लिए 25 वर्ष की अनिवार्य आयु सीमा पूरी करने के मकसद से पिता आजम खान के साथ मिलकर एक साजिश रची गई। इसके तहत एक दूसरा पैन कार्ड बनवाया गया, जिसमें जन्मतिथि बदलकर 30 सितंबर 1990 दर्शाई गई और नामांकन पत्रों में इसी दूसरे पैन कार्ड का उपयोग किया गया। रामपुर की विशेष एमपी-एमएलए अदालत ने दोनों को जालसाजी और धोखाधड़ी का दोषी ठहराया था। बाद में अपीलीय अदालत ने सजा बढ़ाते हुए आजम खान को भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 467 के तहत अधिकतम 10 साल के कठोर कारावास और अब्दुल्ला आजम को 7 साल तक की कैद की सजा सुनाई थी।
हाईकोर्ट में दोनों पक्षों की दलीलें और अदालत का फैसला
इलाहाबाद हाईकोर्ट में आजम खान और अब्दुल्ला आजम की ओर से सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी, एन.आई. जाफरी और शाश्वत आनंद ने पक्ष रखा। बचाव पक्ष ने दलील दी कि दोनों की सजा एक निश्चित अवधि की है और वे पहले ही जेल में एक लंबा समय बिता चुके हैं। कस्टडी सर्टिफिकेट का हवाला देते हुए कोर्ट के सामने रखा गया कि आजम खान 4 साल 1 माह से अधिक और अब्दुल्ला आजम लगभग 3 साल 6 माह की न्यायिक हिरासत काट चुके हैं।
दूसरी ओर, राज्य सरकार की तरफ से अपर महाधिवक्ता अनूप त्रिवेदी और शिकायतकर्ता के वकीलों ने जमानत का कड़ा विरोध करते हुए दोनों के आपराधिक इतिहास का हवाला दिया। कोर्ट को बताया गया कि आजम खान के खिलाफ 90 से अधिक और अब्दुल्ला पर 40 से अधिक मामले दर्ज हैं। दोनों पक्षों की विस्तृत बहस सुनने के बाद न्यायमूर्ति समित गोपाल ने माना कि हिरासत में बिताया गया समय सजा निलंबन और जमानत के लिए पर्याप्त व उचित आधार है। अदालत ने जुर्माने की आधी राशि जमा करने और व्यक्तिगत मुचलके की शर्त पर सजा को निलंबित कर दिया।
दोषसिद्धि पर रोक से इनकार: चुनावी मैदान में उतरने की राह नहीं हुई आसान
जमानत मिलने के बावजूद आजम खान और अब्दुल्ला आजम को एक बड़ा झटका तब लगा जब हाईकोर्ट ने उनकी दोषसिद्धि पर रोक (Stay on Conviction) लगाने की अर्जी को पूरी तरह खारिज कर दिया। अदालत ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि दोषसिद्धि पर रोक लगाने के लिए अपराध की गंभीरता, समाज पर उसके प्रभाव और याचिकाकर्ता के आपराधिक इतिहास को देखना अनिवार्य होता है। चूंकि दोनों नेताओं के खिलाफ कई मामले दर्ज हैं और कुछ में सजा भी हो चुकी है, इसलिए दोषसिद्धि पर रोक लगाने का कोई असाधारण आधार नहीं बनता।
जनप्रतिनिधित्व कानून (RPA) के प्रावधानों के मुताबिक, यदि किसी जनप्रतिनिधि या नागरिक को दो साल या उससे अधिक की सजा सुनाई जाती है, तो वह चुनाव लड़ने के लिए अयोग्य घोषित हो जाता है। सजा निलंबित होने से केवल जेल की अवधि पर रोक लगती है, लेकिन अयोग्यता तभी खत्म होती है जब अदालत दोषसिद्धि पर रोक लगा दे। इस आदेश के बाद फिलहाल दोनों नेताओं के भविष्य में विधानसभा या संसदीय चुनाव लड़ने की कानूनी राह साफ नहीं हो पाई है।
क्या तुरंत जेल से बाहर आ सकेंगे आजम खान और अब्दुल्ला?
हाईकोर्ट के इस फैसले के बाद सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि क्या आजम खान और उनके बेटे तुरंत जेल की सलाखों से बाहर आ जाएंगे? कानूनी जानकारों का कहना है कि दो पैन कार्ड मामले में जमानत मिलना एक बड़ी राहत जरूर है, लेकिन उनकी तत्काल रिहाई इस बात पर निर्भर करेगी कि क्या उनके खिलाफ दर्ज अन्य मामलों में उनकी जमानत अर्जी मंजूर हो चुकी है या नहीं।
आजम खान और अब्दुल्ला आजम के खिलाफ रामपुर में डूंगरपुर बस्ती खाली कराने, शत्रु संपत्ति, दो जन्म प्रमाण पत्र और विश्वविद्यालय से जुड़े जमीन विवादों सहित कई अन्य मुकदमे विचाराधीन हैं। यदि अन्य सभी मामलों में दोनों को पूर्व में जमानत मिल चुकी होगी और किसी अन्य मामले में प्रोडक्शन वारंट लंबित नहीं होगा, तभी जेल प्रशासन से उनकी रिहाई की प्रक्रिया पूरी हो सकेगी। हाईकोर्ट ने इस मामले से जुड़ी पुनरीक्षण याचिकाओं पर अंतिम सुनवाई के लिए जनवरी के तीसरे सप्ताह की तारीख निर्धारित की है।