सीएम योगी का कड़ा रुख: छुट्टी के दिन भी खुलेंगे PWD दफ्तर, गड्ढामुक्ति और सड़कों के निर्माण का मुख्यमंत्री खुद लेंगे हिसाब-किताब

सीएम योगी का कड़ा रुख: छुट्टी के दिन भी खुलेंगे PWD दफ्तर, गड्ढामुक्ति और सड़कों के निर्माण का मुख्यमंत्री खुद लेंगे हिसाब-किताब

उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से लेकर सुदूर ग्रामीण अंचलों तक की सड़कों की दशा सुधारने के लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पूरी तरह एक्शन मोड में आ चुके हैं। प्रदेश में आवागमन को सुगम, सुरक्षित और समयबद्ध बनाने की मुहिम के तहत अब सीधे शीर्ष स्तर से मॉनिटरिंग शुरू हो गई है। आमतौर पर रविवार और सार्वजनिक छुट्टियों के दिन सरकारी कार्यालयों में सन्नाटा पसरा रहता है, लेकिन मुख्यमंत्री के कड़े निर्देशों के बाद लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) में तस्वीर पूरी तरह बदली नजर आ रही है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने विभाग की कार्यप्रणाली, चल रहे निर्माण कार्यों और गड्ढामुक्ति अभियान की प्रगति का सीधा हिसाब मांगने के लिए विशेष समीक्षा बैठक बुलाई है। इस उच्चस्तरीय समीक्षा के चलते मुख्यालय से लेकर जोनल और जिला स्तरीय दफ्तरों में अवकाश के दिन भी सामान्य कार्यदिवस की तरह कामकाज संचालित करने का फरमान जारी कर दिया गया है।

शासन स्तर से जारी स्पष्ट निर्देशों के बाद विभाग के प्रमुख अभियंता, विभागाध्यक्ष, मुख्य अभियंता, अधीक्षण अभियंता और अधिशासी अभियंता स्तर के सभी तकनीकी अधिकारियों को तय प्रारूप पर विस्तृत रिपोर्ट तैयार करने का कड़ा कार्य सौंपा गया है। मुख्यमंत्री का स्पष्ट मानना है कि आधारभूत ढांचा और बेहतर सड़कें किसी भी राज्य के आर्थिक विकास और जनसामान्य के जीवन की रीढ़ होती हैं। ऐसे में यदि विकास योजनाओं की गति में किसी भी प्रकार की लापरवाही, वित्तीय अनियमितता अथवा लेटलतीफी सामने आती है, तो संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाएगी। बैठक से पहले ही शासन की इस अप्रत्याशित सक्रियता ने पूरे लोक निर्माण विभाग के प्रशासनिक और तकनीकी अमले में हलचल मचा दी है।

गड्ढामुक्ति अभियान और जमीनी हकीकत पर सख्त नजर

प्रदेशभर में मानसून की विदाई और त्योहारी सीजन के दस्तक देने के साथ ही सड़कों पर गड्ढों की समस्या आम नागरिकों के लिए सबसे बड़ा सिरदर्द बन जाती है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पूर्व में भी स्पष्ट निर्देश दिए थे कि पूरे उत्तर प्रदेश में हर हाल में अभियान चलाकर सड़कों को गड्ढामुक्त किया जाए। अब समीक्षा बैठक के दौरान मुख्यमंत्री यह परखेंगे कि जमीनी स्तर पर इन निर्देशों का कितना पालन हुआ और कागजी आंकड़ों के पीछे धरातल की हकीकत क्या है। जिलों से आने वाली सार्वजनिक शिकायतों और स्थानीय जनप्रतिनिधियों से मिलने वाले फीडबैक को संज्ञान में लेते हुए सीएम योगी ने साफ कर दिया है कि किसी भी प्रकार की लीपापोती बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

इंजीनियरों को विशेष निर्देश दिया गया है कि वे अपने-अपने कार्यक्षेत्र के अंतर्गत आने वाले राज्य राजमार्गों, प्रमुख जिला मार्गों, अन्य जिला मार्गों और ग्रामीण संपर्क मार्गों का पूरा विवरण भौतिक सत्यापन के साथ प्रस्तुत करें। पैचवर्क का काम टिकाऊ गुणवत्ता के साथ किया गया है अथवा केवल औपचारिकता पूरी की गई है, इसकी भी गहन जांच की जाएगी। विभाग को निर्देश दिए गए हैं कि वे उन विशिष्ट क्षेत्रों की पहचान करें जहां बार-बार पैचवर्क उखड़ जाता है और वहां आधुनिक तकनीकी विधियों जैसे कोल्ड मिक्स या अत्याधुनिक बिटुमिनस मिश्रण का उपयोग सुनिश्चित किया जाए।

अवकाश पर खुले दफ्तर और इंजीनियरों को मिला विशेष टास्क

मुख्यमंत्री के सख्त तेवरों को भांपते हुए लोक निर्माण विभाग के शीर्ष प्रबंधन ने छुट्टी के दिन भी दफ्तर खोलने का औपचारिक आदेश जारी किया है। राजधानी लखनऊ स्थित प्रमुख अभियंता कार्यालय से लेकर वाराणसी, प्रयागराज, कानपुर, मेरठ, गोरखपुर, बरेली, झांसी और आगरा सहित सभी प्रमुख डिविजनों में अवकाश के दिन भी फाइलों का निस्तारण और रिपोर्ट संकलन का कार्य युद्धस्तर पर चल रहा है। सभी फील्ड इंजीनियरों को शनिवार देर रात तक अपने प्रभागों की नवीनतम प्रगति रिपोर्ट मुख्यालय के केंद्रीय डेटाबेस पर अपलोड करने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि समीक्षा के दौरान सीएम के समक्ष सटीक और अद्यतन आंकड़े रखे जा सकें।

इंजीनियरों को मिले टास्क में केवल निर्माण की गति ही शामिल नहीं है, बल्कि चालू वित्तीय वर्ष में स्वीकृत बजट के सापेक्ष अब तक हुए वास्तविक व्यय का लेखा-जोखा भी देना होगा। कई बार यह देखने में आता है कि बजट की पहली किस्त जारी होने के बावजूद प्रशासनिक प्रक्रियाओं, टेंडरिंग के फेर या ठेकेदारों की ढिलाई के कारण परियोजनाएं महीनों लटकी रहती हैं। मुख्यमंत्री इस कार्यप्रणाली पर विशेष रूप से खफा हैं और उन्होंने सीधे निर्देश दिए हैं कि जिन परियोजनाओं में कार्य शुरू होने की समय-सीमा पार हो चुकी है, उनके जिम्मेदार अधिकारियों और ठेकेदारों की सूची अलग से तैयार की जाए।

वित्तीय आवंटन, गुणवत्ता नियंत्रण और जीआईएस मैपिंग की समीक्षा

आधुनिक तकनीक के प्रयोग पर बल देते हुए उत्तर प्रदेश सरकार अब सड़कों के निर्माण और मरम्मत में पारदर्शिता लाने के लिए व्यापक स्तर पर डिजिटल प्रणालियों का उपयोग कर रही है। बैठक में इस बात की भी समीक्षा की जाएगी कि गड्ढामुक्ति और नवीनीकरण से जुड़ी सड़कों की जियो-टैगिंग और जीआईएस मैपिंग का काम कितना पूरा हुआ है। मुख्यमंत्री कार्यालय अब सीधे डिजिटल डैशबोर्ड के जरिए सड़कों की स्थिति की निगरानी कर रहा है, जिससे फील्ड रिपोर्ट और वास्तविक स्थिति के अंतर को तुरंत पकड़ा जा सके। अधिकारियों को यह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया गया है कि 'पहले और बाद की तस्वीरें' (Before and After Photos) संबंधित सरकारी पोर्टल पर सही अक्षांश और देशांतर के साथ अपलोड हों।

गुणवत्ता नियंत्रण को लेकर लोक निर्माण विभाग की फ्लाइंग स्क्वायड और थर्ड पार्टी ऑडिट टीमों की रिपोर्ट भी मुख्यमंत्री के सामने पेश की जाएगी। निर्माण सामग्री की गुणवत्ता, डामर की मोटाई और सड़क की सतह के घनत्व जैसे तकनीकी मानकों पर कोई समझौता नहीं करने की चेतावनी दी गई है। जिन सड़कों के निर्माण के कुछ ही महीनों के भीतर उखड़ने की शिकायतें मिली हैं, उनकी जांच विजिलेंस या तकनीकी सेल से कराने और दोषी पाए जाने पर संबंधित ठेकेदारों को डिबार व ब्लैकलिस्ट करने की तैयारी भी की जा रही है।

जनता की सुगमता और सुरक्षित यात्रा शीर्ष प्राथमिकता

समीक्षा का एक अन्य प्रमुख पहलू धार्मिक पर्यटन स्थलों, औद्योगिक गलियारों, मंडियों और प्रमुख जिला केंद्रों को जोड़ने वाले मार्गों का चौड़ीकरण और सुदृढ़ीकरण है। आगामी त्योहारों के समय प्रदेश में अंतर-जनपदीय आवागमन में भारी वृद्धि होती है। ऐसे में किसी भी जिले में गड्ढों अथवा निर्माणाधीन परियोजनाओं के कारण लंबा ट्रैफिक जाम न लगे, इसके लिए समय-सीमा तय कर काम पूरा करने के आदेश दिए जाएंगे। राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI), यूपी राज्य राजमार्ग प्राधिकरण (UPSHA) और ग्रामीण अभियंत्रण विभाग के साथ बेहतर समन्वय बनाकर सीमांत इलाकों की सड़कों को भी दुरुस्त करने का खाका खींचा जा रहा है।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की इस मैराथन समीक्षा बैठक से स्पष्ट संदेश जा रहा है कि सुशासन और विकास के मामले में परिणाम ही एकमात्र पैमाना है। अवकाश के दिन दफ्तर खुलवाकर डेटा तलब करना यह दर्शाता है कि शासन स्तर पर जनता की सुविधाओं को लेकर किसी भी स्तर पर विश्राम की गुंजाइश नहीं है। फील्ड में तैनात कनिष्ठ अभियंताओं से लेकर लखनऊ में बैठे विभागाध्यक्षों तक सभी की सीधी निगरानी हो रही है, जिससे उम्मीद बंधी है कि प्रदेश की सड़कों पर आवागमन जल्द ही और अधिक सुगम, सुरक्षित और गड्ढामुक्त हो सकेगा।