यूपी में भारी बारिश से जनजीवन बेहाल: 65 हजार किमी सड़कें टूटीं, उफनती नदी में बहा टैंकर
उत्तर प्रदेश में मानसून के आक्रामक तेवर के चलते जनजीवन पूरी तरह अस्तव्यस्त हो चुका है। राज्य के अधिकांश जनपदों में बीते कई दिनों से लगातार हो रही मूसलाधार बारिश ने भारी तबाही मचाई है। कई शहरों में दिन के पारे में 9 से 10 डिग्री सेल्सियस तक की भारी गिरावट दर्ज की गई है। बारिश के कारण प्रदेश के बुनियादी ढांचे को गहरा आघात पहुंचा है, जहां विभिन्न विभागों की कुल 65 हजार किलोमीटर से अधिक सड़कें बुरी तरह टूटकर गड्ढों में तब्दील हो चुकी हैं। वहीं बुंदेलखंड के ललितपुर जिले में रोंगटे खड़े कर देने वाला हादसा सामने आया, जहां पानी के तेज बहाव में एक भारी-भरकम टैंकर तिनके की तरह बह गया।
ललितपुर में रोंगटे खड़े करने वाला हादसा: पुल से नदी में गिरा टैंकर
ललितपुर जिले में लगातार हो रही तेज वर्षा से जामनी बांध का जलस्तर खतरे के निशान के करीब पहुंच गया, जिसके चलते सिंचाई विभाग को बांध के गेट खोलकर करीब 1,900 क्यूसेक पानी छोड़ना पड़ा। पानी छोड़े जाने से नदियां उफान पर आ गईं और निचले पुलों और रपटों के ऊपर तेज धार बहने लगी। महरौनी-नाराहट मुख्य मार्ग पर स्थित कुजान घाट पुल पर करीब तीन फीट पानी का तेज सैलाब गुजर रहा था।
इसी बीच एक टैंकर चालक ने खतरे को नजरअंदाज करते हुए उफनते पुल को पार करने की कोशिश की। पुल के बीच में पहुंचते ही पानी के प्रचंड वेग के कारण टैंकर का संतुलन बिगड़ गया और वाहन नदी की ओर खिसकने लगा। खतरे को भांपते हुए चालक और परिचालक ने ऐन वक्त पर छलांग लगाकर अपनी जान बचा ली। देखते ही देखते पूरा टैंकर पुल से नीचे नदी में गिरकर बह गया और कुछ दूरी पर पत्थरों के बीच जाकर अटक गया। इस घटना के बाद स्थानीय प्रशासन ने उफनते रपटों और पुलों पर आवाजाही पूरी तरह रोक दी है।
प्रदेश में 65 हजार किलोमीटर सड़कें क्षतिग्रस्त, 300 करोड़ का खर्च अनुमानित
लगातार हो रही बारिश और भीषण जलभराव ने प्रदेश के सड़क तंत्र की कमर तोड़ दी है। उत्तर प्रदेश के कुल 5.35 लाख किलोमीटर लंबे रोड नेटवर्क में से लगभग 65,090 किलोमीटर सड़कें टूट-फूट का शिकार हो चुकी हैं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के कड़े निर्देशों के बाद लोक निर्माण विभाग (PWD) समेत अन्य संबंधित विभागों ने सर्वे कर नुकसान का प्रारंभिक आकलन तैयार किया है।
लोक निर्माण विभाग के प्रमुख सचिव अजय चौहान द्वारा की गई उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक में यह तथ्य सामने आया कि प्रदेश भर में इन क्षतिग्रस्त सड़कों को गड्ढामुक्त और दुरुस्त करने में लगभग 250 से 300 करोड़ रुपये का खर्च आएगा। रिपोर्ट के अनुसार, सबसे ज्यादा नुकसान लोक निर्माण विभाग की सड़कों को हुआ है, जहां 47,000 किलोमीटर से अधिक मुख्य मार्ग क्षतिग्रस्त पाए गए हैं। इसके अलावा नगर विकास विभाग की 15,300 किमी, सिंचाई विभाग की 890 किमी, मंडी परिषद की 686 किमी और पंचायती राज विभाग की 520 किमी सड़कें गड्ढों में तब्दील हो चुकी हैं।
त्योहारों से पहले गड्ढामुक्त करने का अल्टीमेटम, युद्धस्तर पर काम शुरू
आगामी दुर्गा पूजा, दशहरा और दीपावली जैसे प्रमुख त्योहारों को ध्यान में रखते हुए शासन ने स्पष्ट आदेश दिया है कि सड़कों की मरम्मत में किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। पीडब्ल्यूडी ने अब तक 9,000 किलोमीटर से ज्यादा सड़कों को मोटरेबल बनाने का काम पूरा कर लिया है।
अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि जिन जिलों में बारिश थम चुकी है, वहां तुरंत पैचवर्क और गड्ढे भरने का काम शुरू किया जाए। हालांकि, डामर की नई सड़कों का पक्का निर्माण बारिश का दौर पूरी तरह थमने के बाद ही गति पकड़ेगा। प्रत्येक सोमवार को मुख्यालय स्तर पर सभी जिलों के सड़क मरम्मत कार्यों की प्रगति की समीक्षा की जाएगी।
बारिश और बाढ़ से जनजीवन प्रभावित, कई जिलों में स्कूल बंद
बारिश के चलते राजधानी लखनऊ, कानपुर, उन्नाव, प्रयागराज, वाराणसी और मुरादाबाद समेत कई जिलों में जलभराव की गंभीर स्थिति बनी हुई है। कई जनपदों में जिला प्रशासन ने एहतियात के तौर पर 12वीं तक के सभी सरकारी व निजी स्कूलों में अवकाश घोषित कर दिया है। मौसम विभाग ने आगामी 24 घंटों के दौरान तराई और मध्य यूपी के कई जिलों में भारी से अत्यधिक भारी बारिश का अलर्ट बरकरार रखा है, जिससे प्रशासन को अलर्ट मोड पर रहने के निर्देश दिए गए हैं।