'सपा का खाता वहां खुला जहां नहीं खुलना चाहिए था!' यूपी MLC चुनाव नतीजों पर डिप्टी सीएम केशव मौर्य का छलका दर्द
उत्तर प्रदेश विधान परिषद (एमएलसी) की 11 शिक्षक और स्नातक सीटों पर संपन्न हुए द्विवार्षिक चुनाव के परिणामों ने सूबे के सियासी तापमान को अचानक बढ़ा दिया है। 2027 के विधानसभा चुनावों से ठीक पहले संपन्न हुए इस चुनाव में भारतीय जनता पार्टी और मुख्य विपक्षी दल समाजवादी पार्टी के बीच जबरदस्त जोर-आजमाइश देखने को मिली। चुनाव के अंतिम आंकड़े सामने आने के बाद उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने मीडिया से मुखातिब होते हुए बेहद अप्रत्याशित और बेबाक बयान दिया। केशव प्रसाद मौर्य ने साफ शब्दों में यह स्वीकार किया कि भाजपा को जितनी सीटों की उम्मीद थी, पार्टी उतनी सीटें नहीं जीत सकी। इसके साथ ही उन्होंने समाजवादी पार्टी की जीत पर चुटकी लेते हुए और अपनी चिंता जाहिर करते हुए कहा कि 'सपा का खाता वहां भी खुल गया, जहां नहीं खुलना चाहिए था'। डिप्टी सीएम के इस बयान के बाद राजधानी लखनऊ से लेकर दिल्ली तक सियासी हलकों में हलचल मच गई और सपा सुप्रीमो अखिलेश यादव ने भी इस पर बेहद तीखा और रहस्यमयी पलटवार कर दिया।
'उम्मीद से कम मिलीं सीटें, करेंगे आत्ममंथन': केशव प्रसाद मौर्य ने क्या-क्या कहा?
लखनऊ में पत्रकारों से बात करते हुए उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने चुनावी नतीजों पर अपनी प्रतिक्रिया में न केवल पार्टी के प्रदर्शन का बचाव किया, बल्कि अपनी कमियों पर विचार करने की बात भी कही। केशव मौर्य ने कहा कि विधान परिषद के स्नातक और शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों के चुनाव आम चुनाव से बिल्कुल अलग होते हैं। यह चुनाव बहुत ही योग्य, प्रबुद्ध और शिक्षित वर्ग के मताधिकार के आधार पर संपन्न होता है।
केशव प्रसाद मौर्य ने कहा, "भारतीय जनता पार्टी ने अपना पिछला प्रदर्शन तो दोहराया है, लेकिन हम लोग इस बार और अधिक सीटें जीतने की अपेक्षा कर रहे थे। हमें उतनी सीटें नहीं मिल पाईं जितनी हमें आशा थी। पार्टी इस बात की गहराई से समीक्षा करेगी। सबसे बड़ी बात यह है कि सपा का वहां भी खाता खुल गया, जहां नहीं खुलना चाहिए था। हम इस पूरे विषय पर गंभीरता से विचार और आत्ममंथन करेंगे ताकि आने वाले चुनावों में भाजपा फिर से एकतरफा जीत दर्ज कर सके।" डिप्टी सीएम का इशारा सीधे तौर पर वाराणसी और लखनऊ जैसी उन सीटों की ओर था, जहां शिक्षित मतदाताओं ने सत्ताधारी दल के सिटिंग और कद्दावर उम्मीदवारों को हराकर सपा प्रत्याशियों को विधान परिषद भेज दिया।
वाराणसी और लखनऊ में कैसे पलटा पासा: क्यों असहज हुआ सत्ताधारी खेमा?
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि केशव प्रसाद मौर्य का दर्द अकारण नहीं छलका है। 11 सीटों में से भाजपा जहां 6 सीटों पर सिमट गई, वहीं समाजवादी पार्टी ने 5 सीटों पर अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज कराई। सबसे बड़ा झटका प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी और राज्य की राजधानी लखनऊ में लगा। प्रधानमंत्री के गढ़ वाराणसी में सपा के लाल बिहारी यादव ने शिक्षक सीट पर भाजपा को पटखनी दे दी। वहीं लखनऊ खंड स्नातक सीट पर सपा की कांति सिंह ने भाजपा के सिटिंग एमएलसी अवनीश कुमार सिंह को 17 हजार से अधिक वोटों के भारी अंतर से पराजित कर दिया। इसके अलावा इलाहाबाद-झांसी स्नातक सीट पर सपा के डॉ. मानसिंह यादव ने 27 हजार से अधिक वोटों के अंतर से बड़ी जीत दर्ज की।
सपा का यह प्रदर्शन इसलिए भी भाजपा के लिए चौंकाने वाला है क्योंकि स्नातक और शिक्षक सीटें पारंपरिक रूप से भाजपा और गैर-सपा खेमे का मजबूत गढ़ मानी जाती रही हैं। इन सीटों पर शिक्षित युवाओं, शिक्षकों और सरकारी कर्मचारियों का वोटिंग पैटर्न सरकार के कामकाज का बैरोमीटर समझा जाता है। जब राजधानी लखनऊ और प्रधानमंत्री के संसदीय क्षेत्र वाराणसी में सपा का परचम लहराया, तो केशव मौर्य का यह कहना कि 'सपा का खाता वहां खुला जहां नहीं खुलना चाहिए था', पार्टी के अंतर्विरोध और हैरानी को सार्वजनिक रूप से उजागर कर गया।
अखिलेश यादव का पलटवार: 'घर छोड़ देने से कोई बेगाना नहीं हो जाता'
उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य के इस बयान के बाद समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर एक के बाद एक तीखे तीर छोड़े। अखिलेश यादव ने केशव मौर्य के बयान पर चुटकी लेते हुए लिखा कि भाजपा के कुछ बड़े नेता दरअसल अंदर ही अंदर पीडीए (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) की इस ऐतिहासिक जीत से बेहद खुश हैं। अखिलेश ने केशव मौर्य के पिछड़े वर्ग की पृष्ठभूमि की तरफ परोक्ष इशारा करते हुए लिखा, "घर छोड़ देने से कोई बेगाना नहीं हो जाता।" अखिलेश के इस एक वाक्य ने यूपी की राजनीति में नई बहस छेड़ दी कि क्या भाजपा के भीतर भी पिछड़े नेताओं का एक वर्ग इन नतीजों को देखकर मौन साधे हुए है।
इसके साथ ही अखिलेश यादव ने गोरखपुर-फैजाबाद शिक्षक सीट के नतीजों पर सवाल खड़े करते हुए भाजपा और स्थानीय प्रशासन पर धांधली का गंभीर आरोप लगाया। अखिलेश ने कहा कि यदि गोरखपुर में प्रशासनिक हस्तक्षेप न होता, तो वहां भी परिणाम वाराणसी की तरह ही सपा के पक्ष में होते। उन्होंने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि जनता द्वारा चुनी जाने वाली पीडीए सरकार बनते ही उन तमाम भ्रष्ट अधिकारियों का हिसाब किया जाएगा जिन्होंने सत्ता के दबाव में काम किया है। इसके साथ ही अखिलेश ने पार्टी कार्यकर्ताओं से किसी भी तरह के उग्र विजय जुलूस से बचने और शांति बनाए रखने की अपील की।
2027 के विधानसभा चुनाव की बिसात: प्रबुद्ध वर्ग का यह संदेश भाजपा के लिए खतरे की घंटी?
एमएलसी चुनाव के इन नतीजों और नेताओं की जुबानी जंग ने यह साफ कर दिया है कि उत्तर प्रदेश में 2027 का चुनावी संग्राम बेहद कड़ा होने वाला है। भाजपा ने मेरठ स्नातक, मेरठ शिक्षक, आगरा स्नातक, बरेली-मुरादाबाद शिक्षक और लखनऊ शिक्षक सीट जीतकर अपनी साख जरूर बचाई है, लेकिन स्नातक सीटों पर सपा की जोरदार सेंधमारी यह संकेत देती है कि पुरानी पेंशन बहाली (OPS), आउटसोर्सिंग, पेपर लीक और बेरोजगारी जैसे मुद्दों पर पढ़ा-लिखा युवा वर्ग सरकार से नाराज है।
सपा प्रवक्ता राजेंद्र चौधरी और अन्य नेताओं ने कहा है कि यह जीत साबित करती है कि पीडीए का फॉर्मूला अब सिर्फ ग्रामीण इलाकों या पारंपरिक जातियों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि शहरों के बुद्धिजीवियों और युवाओं ने भी अखिलेश यादव के विजन पर मुहर लगाई है। वहीं दूसरी तरफ, केशव प्रसाद मौर्य के स्वीकारोक्ति भरे बयान के बाद भाजपा संगठन में अब इन परिणामों की बूथवार समीक्षा की तैयारी शुरू हो चुकी है। पार्टी यह पता लगाने में जुट गई है कि अपने ही अभेद्य किलों में स्नातक और शिक्षक मतदाताओं का मोहभंग कैसे हुआ। यह साफ है कि एमएलसी चुनाव के इस परिणाम ने 2027 के महामुकाबले से पहले सूबे की राजनीति में नए समीकरणों की नींव रख दी है।