अब तक 16 लोगों की मौत, 339 घर जमींदोज; नाग्चू में हाड़ कंपाती ठंड के बीच रेस्क्यू ऑपरेशन जारी
चीन के सुदूर एवं उच्च पर्वतीय तिब्बत स्वायत्त क्षेत्र में गुरुवार की देर रात आए एक भीषण और विनाशकारी भूकंप ने भारी तबाही मचा दी है। रिक्टर पैमाने पर 7.0 की तीव्र तीव्रता वाले इस भीषण भूगर्भीय झटके ने पूरे पठारी इलाके को बुरी तरह हिलाकर रख दिया। आपदा के शुरुआती दौर में ही कम से कम 16 लोगों के दर्दनाक मौत की आधिकारिक पुष्टि हो चुकी है, जबकि 32 से अधिक नागरिक गंभीर रूप से घायल हो गए हैं। भूकंप के मुख्य झटके के बाद इलाके में लगातार 3 से 4 तीव्रता के कई आफ्टरशॉक्स (हल्के झटके) दर्ज किए जा रहे हैं, जिससे पूरे क्षेत्र के नागरिकों में जबरदस्त दहशत का माहौल है। चीनी भूगर्भ वैज्ञानिकों के अनुसार, जनवरी 2024 के बाद से चीन और उसके अधिकार क्षेत्र वाले तिब्बती भूभाग में दर्ज किया गया यह अब तक का सबसे शक्तिशाली और विनाशकारी भूकंप साबित हुआ है। सैकड़ों रिहायशी ढांचे ताश के पत्तों की तरह ढह गए हैं और मलबे के नीचे दबे लोगों को सुरक्षित बाहर निकालने के लिए युद्धस्तर पर बचाव अभियान चलाया जा रहा है।
नाग्चू में 10 किमी की गहराई पर था भूकंप का केंद्र: 4864 मीटर की ऊंचाई पर मची भारी तबाही
चीन भूकंप नेटवर्क केंद्र (CENC) द्वारा जारी किए गए वैज्ञानिक आंकड़ों के अनुसार, इस भीषण भूकंप के झटके गुरुवार रात स्थानीय समयानुसार लगभग 10:33 बजे महसूस किए गए। भूकंप का केंद्र उत्तरी तिब्बत के बेहद ऊंचे और दुर्गम नाग्चू (नागकू) प्रशासनिक क्षेत्र में जमीन के भीतर महज 10 किलोमीटर की उथली गहराई पर स्थित था। उथले केंद्र वाले भूकंप सतह पर सबसे ज्यादा ऊर्जा छोड़ते हैं, जिसके चलते इस इलाके में कंपन का विनाशकारी असर बहुत व्यापक रहा। यह पूरा इलाका समुद्र तल से लगभग 4,864 मीटर की अत्यधिक औसत ऊंचाई पर स्थित है, जहां पहले से ही ऑक्सीजन की कमी और कठिन भौगोलिक परिस्थितियां मौजूद हैं। भूकंप का मुख्य केंद्र तिब्बत की ऐतिहासिक राजधानी ल्हासा से लगभग 400 किलोमीटर दूर था, लेकिन कंपन इतना तीव्र था कि ल्हासा समेत आसपास के सैकड़ों किलोमीटर दूर स्थित नगरों और ग्रामीण बस्तियों में भी इमारतें हिलने लगीं और लोग गहरी नींद से जागकर बदहवास सड़कों की तरफ भागे।
339 घर पूरी तरह जमींदोज, 11 की हालत नाजुक: गाड़ियां और खुली सड़कें बनीं रात का सहारा
नाग्चू शहर के स्थानीय मीडिया कार्यालय और प्रशासनिक अधिकारियों के हवाले से जो शुरुआती नुकसान का आकलन सामने आया है, वह दिल दहला देने वाला है। भूकंप की भयावह तीव्रता के चलते अब तक कम से कम 339 मकान पूरी तरह मलबे के ढेर में तब्दील हो चुके हैं, जबकि सैकड़ों अन्य रिहायशी भवनों में बड़ी-बड़ी दरारें आ गई हैं। अस्पतालों में भर्ती कराए गए 32 घायलों में से 11 की स्थिति अत्यंत गंभीर बनी हुई है, जिन्हें बेहतर चिकित्सा उपचार के लिए बड़े ट्रॉमा सेंटरों में एयरलिफ्ट करने की तैयारी की जा रही है, जबकि 21 अन्य लोगों को प्राथमिक उपचार दिया गया है। भूकंप केंद्र के निकटवर्ती गांवों से सामने आ रहे वीडियो और तस्वीरों में देखा जा सकता है कि भूकंप का पहला झटका लगते ही ग्रामीण अपने घरों की छतें गिरने के डर से खुले मैदानों में दौड़ पड़े। लगातार आ रहे आफ्टरशॉक्स के खौफ से लोगों ने पूरी रात हाड़ कंपा देने वाली बर्फीली ठंड के बीच सड़कों, मैदानों और अपनी गाड़ियों में बैठकर गुजारी।
माइनस तापमान में पुलिस और फायर ब्रिगेड का रेस्क्यू: तंबुओं और राहत सामग्री की व्यवस्था शुरू
उत्तरी तिब्बत के इस अत्यधिक ऊंचे पठार पर इस समय कड़ाके की सर्दी पड़ रही है, जहां तापमान शून्य से कई डिग्री नीचे जा चुका है। ऐसे विषम मौसम में स्थानीय पुलिस, अग्निशमन विभाग (फायर ब्रिगेड) और चीनी सशस्त्र पुलिस बल के सैकड़ों जवान राहत और बचाव कार्य में जुटे हुए हैं। बचाव दल मलबे में दबे जीवित लोगों की तलाश के लिए आधुनिक लाइफ डिटेक्टर्स और खोजी कुत्तों की मदद ले रहे हैं। जिन परिवारों के घर पूरी तरह नष्ट हो चुके हैं, उन्हें कड़ाके की ठंड से बचाने के लिए प्रशासन की ओर से त्वरित गति से आपातकालीन थर्मल तंबू लगाए जा रहे हैं। इसके साथ ही प्रभावित ग्रामीणों के बीच गर्म कपड़े, रजाई, प्राथमिक चिकित्सा किट, डिब्बाबंद भोजन और पीने का साफ पानी वितरित करने के लिए विशेष काफिले रवाना किए गए हैं।
संवेदनशील हिमालयी प्लेट पर बसा है तिब्बत: भविष्य में बड़े झटकों का खतरा बरकरार
तिब्बत का पठार भूगर्भीय रूप से दुनिया के सबसे संवेदनशील और सक्रिय सिस्मिक जोन में गिना जाता है। भारतीय टेक्टोनिक प्लेट और यूरेशियन टेक्टोनिक प्लेट के बीच लगातार होने वाले घर्षण और दबाव के कारण इस समूचे हिमालयी और तिब्बती क्षेत्र में अक्सर भारी भूकंप आते रहते हैं। भूवैज्ञानिकों का कहना है कि 7.0 तीव्रता के इस मुख्य भूकंप के बाद जमीन के नीचे संचित ऊर्जा रिलीज हो रही है, जिससे अगले 48 से 72 घंटों तक लगातार आफ्टरशॉक्स आने की पूरी संभावना बनी हुई है। प्रशासन ने लोगों को क्षतिग्रस्त और दरार वाले कच्चे मकानों में दोबारा लौटने से सख्त मना किया है। स्थानीय आपदा प्रबंधन दल हाई अलर्ट पर हैं ताकि किसी भी नए झटके की स्थिति में जान-माल के नुकसान को न्यूनतम किया जा सके।
मेटा डिस्क्रिप्शन
तिब्बत में 7.0 तीव्रता का विनाशकारी भूकंप: अब तक 16 लोगों की मौत, 339 घर जमींदोज; नाग्चू में हाड़ कंपाती ठंड के बीच रेस्क्यू ऑपरेशन जारी
चीन के सुदूर एवं उच्च पर्वतीय तिब्बत स्वायत्त क्षेत्र में गुरुवार की देर रात आए एक भीषण और विनाशकारी भूकंप ने भारी तबाही मचा दी है। रिक्टर पैमाने पर 7.0 की तीव्र तीव्रता वाले इस भीषण भूगर्भीय झटके ने पूरे पठारी इलाके को बुरी तरह हिलाकर रख दिया। आपदा के शुरुआती दौर में ही कम से कम 16 लोगों के दर्दनाक मौत की आधिकारिक पुष्टि हो चुकी है, जबकि 32 से अधिक नागरिक गंभीर रूप से घायल हो गए हैं। भूकंप के मुख्य झटके के बाद इलाके में लगातार 3 से 4 तीव्रता के कई आफ्टरशॉक्स (हल्के झटके) दर्ज किए जा रहे हैं, जिससे पूरे क्षेत्र के नागरिकों में जबरदस्त दहशत का माहौल है। चीनी भूगर्भ वैज्ञानिकों के अनुसार, जनवरी 2024 के बाद से चीन और उसके अधिकार क्षेत्र वाले तिब्बती भूभाग में दर्ज किया गया यह अब तक का सबसे शक्तिशाली और विनाशकारी भूकंप साबित हुआ है। सैकड़ों रिहायशी ढांचे ताश के पत्तों की तरह ढह गए हैं और मलबे के नीचे दबे लोगों को सुरक्षित बाहर निकालने के लिए युद्धस्तर पर बचाव अभियान चलाया जा रहा है।
नाग्चू में 10 किमी की गहराई पर था भूकंप का केंद्र: 4864 मीटर की ऊंचाई पर मची भारी तबाही
चीन भूकंप नेटवर्क केंद्र (CENC) द्वारा जारी किए गए वैज्ञानिक आंकड़ों के अनुसार, इस भीषण भूकंप के झटके गुरुवार रात स्थानीय समयानुसार लगभग 10:33 बजे महसूस किए गए। भूकंप का केंद्र उत्तरी तिब्बत के बेहद ऊंचे और दुर्गम नाग्चू (नागकू) प्रशासनिक क्षेत्र में जमीन के भीतर महज 10 किलोमीटर की उथली गहराई पर स्थित था। उथले केंद्र वाले भूकंप सतह पर सबसे ज्यादा ऊर्जा छोड़ते हैं, जिसके चलते इस इलाके में कंपन का विनाशकारी असर बहुत व्यापक रहा। यह पूरा इलाका समुद्र तल से लगभग 4,864 मीटर की अत्यधिक औसत ऊंचाई पर स्थित है, जहां पहले से ही ऑक्सीजन की कमी और कठिन भौगोलिक परिस्थितियां मौजूद हैं। भूकंप का मुख्य केंद्र तिब्बत की ऐतिहासिक राजधानी ल्हासा से लगभग 400 किलोमीटर दूर था, लेकिन कंपन इतना तीव्र था कि ल्हासा समेत आसपास के सैकड़ों किलोमीटर दूर स्थित नगरों और ग्रामीण बस्तियों में भी इमारतें हिलने लगीं और लोग गहरी नींद से जागकर बदहवास सड़कों की तरफ भागे।
339 घर पूरी तरह जमींदोज, 11 की हालत नाजुक: गाड़ियां और खुली सड़कें बनीं रात का सहारा
नाग्चू शहर के स्थानीय मीडिया कार्यालय और प्रशासनिक अधिकारियों के हवाले से जो शुरुआती नुकसान का आकलन सामने आया है, वह दिल दहला देने वाला है। भूकंप की भयावह तीव्रता के चलते अब तक कम से कम 339 मकान पूरी तरह मलबे के ढेर में तब्दील हो चुके हैं, जबकि सैकड़ों अन्य रिहायशी भवनों में बड़ी-बड़ी दरारें आ गई हैं। अस्पतालों में भर्ती कराए गए 32 घायलों में से 11 की स्थिति अत्यंत गंभीर बनी हुई है, जिन्हें बेहतर चिकित्सा उपचार के लिए बड़े ट्रॉमा सेंटरों में एयरलिफ्ट करने की तैयारी की जा रही है, जबकि 21 अन्य लोगों को प्राथमिक उपचार दिया गया है। भूकंप केंद्र के निकटवर्ती गांवों से सामने आ रहे वीडियो और तस्वीरों में देखा जा सकता है कि भूकंप का पहला झटका लगते ही ग्रामीण अपने घरों की छतें गिरने के डर से खुले मैदानों में दौड़ पड़े। लगातार आ रहे आफ्टरशॉक्स के खौफ से लोगों ने पूरी रात हाड़ कंपा देने वाली बर्फीली ठंड के बीच सड़कों, मैदानों और अपनी गाड़ियों में बैठकर गुजारी।
माइनस तापमान में पुलिस और फायर ब्रिगेड का रेस्क्यू: तंबुओं और राहत सामग्री की व्यवस्था शुरू
उत्तरी तिब्बत के इस अत्यधिक ऊंचे पठार पर इस समय कड़ाके की सर्दी पड़ रही है, जहां तापमान शून्य से कई डिग्री नीचे जा चुका है। ऐसे विषम मौसम में स्थानीय पुलिस, अग्निशमन विभाग (फायर ब्रिगेड) और चीनी सशस्त्र पुलिस बल के सैकड़ों जवान राहत और बचाव कार्य में जुटे हुए हैं। बचाव दल मलबे में दबे जीवित लोगों की तलाश के लिए आधुनिक लाइफ डिटेक्टर्स और खोजी कुत्तों की मदद ले रहे हैं। जिन परिवारों के घर पूरी तरह नष्ट हो चुके हैं, उन्हें कड़ाके की ठंड से बचाने के लिए प्रशासन की ओर से त्वरित गति से आपातकालीन थर्मल तंबू लगाए जा रहे हैं। इसके साथ ही प्रभावित ग्रामीणों के बीच गर्म कपड़े, रजाई, प्राथमिक चिकित्सा किट, डिब्बाबंद भोजन और पीने का साफ पानी वितरित करने के लिए विशेष काफिले रवाना किए गए हैं।
संवेदनशील हिमालयी प्लेट पर बसा है तिब्बत: भविष्य में बड़े झटकों का खतरा बरकरार
तिब्बत का पठार भूगर्भीय रूप से दुनिया के सबसे संवेदनशील और सक्रिय सिस्मिक जोन में गिना जाता है। भारतीय टेक्टोनिक प्लेट और यूरेशियन टेक्टोनिक प्लेट के बीच लगातार होने वाले घर्षण और दबाव के कारण इस समूचे हिमालयी और तिब्बती क्षेत्र में अक्सर भारी भूकंप आते रहते हैं। भूवैज्ञानिकों का कहना है कि 7.0 तीव्रता के इस मुख्य भूकंप के बाद जमीन के नीचे संचित ऊर्जा रिलीज हो रही है, जिससे अगले 48 से 72 घंटों तक लगातार आफ्टरशॉक्स आने की पूरी संभावना बनी हुई है। प्रशासन ने लोगों को क्षतिग्रस्त और दरार वाले कच्चे मकानों में दोबारा लौटने से सख्त मना किया है। स्थानीय आपदा प्रबंधन दल हाई अलर्ट पर हैं ताकि किसी भी नए झटके की स्थिति में जान-माल के नुकसान को न्यूनतम किया जा सके।