'ट्रंप के सार्वजनिक इनकार के बावजूद हमें मध्यस्थों से औपचारिक जवाब का इंतजार' होर्मुज जलडमरूमध्य और शांति प्रस्ताव पर बोले ईरानी विदेश मंत्री
मध्य पूर्व में सैन्य संघर्ष, समुद्री नाकाबंदी और कूटनीतिक रस्साकशी के बीच अमेरिका और ईरान के संबंध एक बार फिर बेहद नाजुक मोड़ पर पहुंच गए हैं। हाल ही में संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) के दौरान कतर और अन्य अंतरराष्ट्रीय मध्यस्थों के जरिए तेहरान की ओर से भेजे गए शांति प्रस्ताव को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा सार्वजनिक तौर पर खारिज किए जाने के बाद ईरान की पहली विस्तृत प्रतिक्रिया सामने आई है। ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची ने स्पष्ट किया है कि ट्रंप के बयानों और सोशल मीडिया पोस्ट्स के बावजूद ईरान अभी भी इस प्रस्ताव पर अमेरिका के अंतिम, लिखित और औपचारिक रुख का इंतजार कर रहा है। अराघची ने जोर देकर कहा कि इस सैन्य गतिरोध का कोई स्थायी समाधान बंदूकों से नहीं, बल्कि बातचीत और कूटनीति की मेज से ही निकल सकता है।
क्या था ईरान का प्रस्ताव जिसे ट्रंप ने नकारा?
न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र महासभा के सत्र के दौरान ईरान ने क्षेत्रीय तनाव घटाने के लिए एक संक्षिप्त रूपरेखा तैयार की थी। इस प्रस्ताव में दोनों पक्षों के बीच सात दिनों के युद्धविराम (सीजफायर) और वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के सबसे अहम समुद्री मार्ग 'स्ट्रेट ऑफ होर्मुज' (Strait of Hormuz) को वाणिज्यिक जहाजों के लिए सुरक्षित व सुचारू रूप से दोबारा खोलने की पेशकश शामिल थी। अमेरिका द्वारा लगाए गए आर्थिक प्रतिबंधों और समुद्री नाकाबंदी के चलते इस जलमार्ग में व्यापारिक जहाजों की आवाजाही बुरी तरह प्रभावित हुई है।
हालांकि, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस प्रस्ताव को यह कहते हुए ठुकरा दिया कि ईरान इस वक्त चौतरफा अंतरराष्ट्रीय दबाव और प्रतिबंधों की मार से घिरा हुआ है, इसलिए वह जल्दबाजी में समझौता करना चाहता है। वॉल स्ट्रीट जर्नल समेत अमेरिकी मीडिया की रिपोर्ट्स में यह भी दावा किया गया कि ट्रंप प्रशासन को संदेह है कि ईरान अपनी शर्तों पर कायम रहेगा, जिसके चलते प्रारंभिक स्तर पर इसे खारिज करने की बात कही गई।
'ट्रंप अक्सर विरोधाभासी बातें करते हैं'—अराघची की दो-टूक
अमेरिकी इनकार पर प्रतिक्रिया देते हुए ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने अमेरिकी बयानों की कार्यशैली पर सवाल उठाए। एक साक्षात्कार और अपने आधिकारिक टेलीग्राम चैनल पर अराघची ने कहा कि अमेरिकी राष्ट्रपति के बयानों में अक्सर विरोधाभास देखने को मिलता है। उन्होंने कहा, "अमेरिकी राष्ट्रपति ने कुछ अच्छी बातें भी कही हैं और कई विरोधाभासी बातें भी, जो हम उनसे लगातार सुनते आ रहे हैं। लेकिन कूटनीति सार्वजनिक टिप्पणियों से नहीं चलती। मध्यस्थ देशों ने अभी तक अमेरिका की तरफ से आधिकारिक रूप से प्रस्ताव खारिज किए जाने की अंतिम पुष्टि हमें नहीं दी है। इसलिए हम मध्यस्थों के जरिए वॉशिंगटन के औपचारिक और अंतिम जवाब की प्रतीक्षा कर रहे हैं। उसी के आधार पर ईरान अपनी अगली रणनीति तय करेगा।’"
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर ईरान की शर्तें और कूटनीतिक दबाव
अराघची ने साफ किया कि ईरान स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को फिर से खोलने के लिए तैयार है, लेकिन इसके लिए तेहरान की अपनी बुनियादी शर्तें हैं जिनका सम्मान किया जाना अनिवार्य है। उन्होंने चेतावनी भरे लहजे में यह भी जोड़ा कि अगर अमेरिका या उसके सहयोगी यह सोचते हैं कि वे ईरान को सैन्य धमकियों या एकतरफा डेडलाइन देकर झुका सकते हैं, तो यह उनकी बड़ी भूल होगी।
ईरानी विदेश मंत्री ने कहा कि उनका देश अपनी संप्रभुता और अधिकारों की रक्षा के लिए हर स्थिति का सामना करने को तैयार है, लेकिन पहली प्राथमिकता बातचीत को ही दी जानी चाहिए। मध्यस्थ देशों की कोशिशें अभी पूरी तरह खत्म नहीं हुई हैं और बैक-चैनल वार्ताएं जारी रहने के संकेत मिल रहे हैं, जिससे आने वाले कुछ दिन वैश्विक तेल बाजार और मध्य पूर्व की शांति के लिए बेहद निर्णायक साबित हो सकते हैं।