तेल दिग्गज अरामको ने खाली कराया अपना मुख्यालय, हूती हमलों से दम्माम से रियाद तक खलबली
पश्चिम एशिया में रणनीतिक और आर्थिक तनाव एक बार फिर बेहद खतरनाक मोड़ पर पहुंच चुका है। सऊदी अरब की सबसे बड़ी राष्ट्रीय तेल कंपनी 'सऊदी अरामको' (Saudi Aramco) ने अपने पूर्वी प्रांत स्थित मुख्य मुख्यालय से बचे हुए सभी कर्मचारियों को तत्काल परिसर खाली करने का कड़ा निर्देश जारी कर दिया है। पिछले दिनों मुख्यालय क्षेत्र पर हुए हवाई हमले के बाद गैर-जरूरी स्टाफ को पहले ही वर्क फ्रॉम होम की अनुमति दी गई थी, लेकिन अब हालात की संवेदनशीलता को देखते हुए पूरे मुख्यालय परिसर को खाली करा दिया गया है। कर्मचारियों को अगले आदेश तक अपने घरों से ही काम करने के लिए कहा गया है। हालांकि, रिहायशी इलाकों को अभी बंद या खाली नहीं किया गया है, लेकिन कार्यस्थलों से कर्मियों को हटाया जाना यह साफ दर्शाता है कि सऊदी अरब के भीतर बुनियादी ढांचे की सुरक्षा को लेकर चिंताएं किस कदर बढ़ चुकी हैं। यह आपातकालीन कदम दम्माम एयरपोर्ट पर देर रात हुए उस भीषण हमले के कुछ ही घंटों बाद उठाया गया, जिसमें दो लोगों की जान चली गई और आठ अन्य नागरिक गंभीर रूप से घायल हो गए।
दम्माम एयरपोर्ट पर देर रात हमला: दो की मौत के बाद अरामको ने जारी किया इवैक्यूएशन ऑर्डर
दम्माम के अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर देर रात हुए हमले के तुरंत बाद सुरक्षा एजेंसियों में हड़कंप मच गया। इस हमले में निर्दोष नागरिकों की जान जाने और हवाई सेवाओं के प्रभावित होने के बाद अरामको प्रबंधन ने बिना किसी देरी के इवैक्यूएशन ऑर्डर जारी कर दिया। सूत्रों के अनुसार, कर्मचारियों को जारी किए गए आधिकारिक संदेश में किसी विशिष्ट खतरे का सीधे तौर पर उल्लेख नहीं किया गया, लेकिन सुरक्षा प्रोटोकॉल के उच्चतम स्तर को सक्रिय करते हुए सभी को सुरक्षित स्थानों पर जाने को कहा गया। पिछले सप्ताह जब हूती विद्रोहियों ने अरामको के ऑपरेशंस सेंटर वाली इमारत को निशाना बनाया था, तब प्रत्यक्षदर्शियों और कर्मचारियों ने बताया था कि टावर की ऊपरी तीन मंजिलें बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई थीं। उसी समय से प्रशासन फूंक-फूंक कर कदम रख रहा था, लेकिन दम्माम की ताजा घटना ने खतरे की गंभीरता को कई गुना बढ़ा दिया है।
रियाद से मदीना तक मंडरा रहे ड्रोन: सऊदी एयर डिफेंस ने मार गिराए चार मानव रहित विमान
यमन के ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों के हमलों का दायरा अब केवल सीमावर्ती इलाकों तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि यह सऊदी अरब के रणनीतिक और धार्मिक केंद्रों तक फैल चुका है। गुरुवार को सऊदी एयर डिफेंस सिस्टम ने राजधानी रियाद और पवित्र शहर मदीना के संवेदनशील इलाकों की ओर बढ़ रहे चार विस्फोटक ड्रोनों को हवा में ही इंटरसेप्ट कर नष्ट करने का दावा किया। मदीना जैसे पवित्र क्षेत्र के पास ड्रोन की मौजूदगी ने समूचे अरब जगत में चिंता की लहर पैदा कर दी है। सऊदी अधिकारियों का कहना है कि नागरिक ठिकानों और धार्मिक स्थलों को निशाना बनाने की यह साजिश बेहद निंदनीय है। एयर डिफेंस सिस्टम भले ही अधिकांश खतरों को हवा में निष्क्रिय कर रहे हैं, लेकिन लगातार हो रहे हमलों ने पूरे देश में हवाई यातायात, व्यापारिक गतिविधियों और सामान्य जनजीवन पर गहरा असर डाला है।
जुलाई में टूटा सालों पुराना युद्धविराम: लाल सागर में नाकाबंदी और बुनियादी ढांचे पर सीधे वार
यमन में लंबे समय से चला आ रहा संघर्ष इस वर्ष जुलाई में उस समय दोबारा भड़क उठा, जब कई वर्षों से लागू अनौपचारिक युद्धविराम अचानक टूट गया। युद्धविराम समाप्त होते ही हूती विद्रोहियों ने सऊदी अरब के खिलाफ आक्रामक समुद्री नाकाबंदी की घोषणा कर दी और लाल सागर से गुजरने वाले व्यापारिक जहाजों, सऊदी तेल रिफाइनरियों तथा प्रमुख हवाई अड्डों पर ताबड़तोड़ हमले शुरू कर दिए। सितंबर के महीने में हूती लड़ाकों ने लाल सागर तट पर यमन की अंतरराष्ट्रीय मान्यता प्राप्त सरकार के नियंत्रण वाले कई अहम इलाकों पर बड़ा जमीनी हमला बोलकर कब्जा जमा लिया था। इसके जवाब में सऊदी अरब के नेतृत्व वाले सैन्य गठबंधन की वायुसेना भी यमन में हूती नियंत्रण वाले ठिकानों पर लगातार हवाई हमले कर रही है। दोनों पक्षों के बीच जारी इस ताजा सैन्य टकराव ने पूरे फारस की खाड़ी क्षेत्र में स्थिरता को दांव पर लगा दिया है।
नागरिक हवाई अड्डों पर हमलों में 22 मौतें: वैश्विक निवेश सम्मेलन टला, तेल आपूर्ति पर संशय
हूती विद्रोहियों द्वारा नागरिक हवाई अड्डों और बंदरगाहों को निशाना बनाए जाने की रणनीति का खामियाजा आम लोगों को भुगतना पड़ रहा है। चालू महीने में सऊदी अरब के विभिन्न एयरपोर्ट्स पर हुए हमलों और मलबे की चपेट में आने से अब तक 22 लोगों की मौत हो चुकी है। राजधानी रियाद का अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा कई दिनों तक बंद रहने के कारण हजारों यात्री फंसे रहे और अंतरराष्ट्रीय उड़ानों को दूसरे देशों में डायवर्ट करना पड़ा। सुरक्षा की इस अनिश्चित स्थिति के चलते सऊदी अरब में आयोजित होने वाले एक बड़े अंतरराष्ट्रीय निवेश सम्मेलन को भी अनिश्चितकाल के लिए टालना पड़ा है, जो सऊदी विजन 2030 के तहत विदेशी पूंजी जुटाने के लिए बेहद अहम माना जा रहा था। दुनिया की सबसे बड़ी तेल निर्यातक कंपनी अरामको के मुख्यालय का खाली होना वैश्विक ऊर्जा बाजार के लिए भी खतरे की घंटी है, जिससे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में भारी उछाल आने की आशंका जताई जा रही है।