क्या लैब में बने सोने से गिरेगी गोल्ड की कीमत? जानिए स्टार्टअप के दावे की पूरी सच्चाई और हीरे से इसका फर्क

क्या लैब में बने सोने से गिरेगी गोल्ड की कीमत? जानिए स्टार्टअप के दावे की पूरी सच्चाई और हीरे से इसका फर्क

अंतरराष्ट्रीय बुलियन और कमोडिटी बाजार में उस वक्त खलबली मच गई जब सैन फ्रांसिस्को स्थित फ्यूजन टेक्नोलॉजी स्टार्टअप मैराथन फ्यूजन (Marathon Fusion) ने सोशल मीडिया पर यह दावा किया कि उसने पारे (Mercury) को असली, स्थिर सोने (Gold-197) में बदलने में सफलता हासिल कर ली है। कंपनी का दावा है कि उसने न्यूक्लियर ट्रांसम्यूटेशन (Nuclear Transmutation) तकनीक के जरिए यूरोपियन रिसर्च ऑर्गनाइजेशन सर्न (CERN) के पुराने रिकॉर्ड को दस गुना पीछे छोड़ दिया है। इस खबर के सामने आते ही आभूषण प्रेमियों, निवेशकों और आम उपभोक्ताओं के बीच यह चर्चा तेज हो गई कि जिस तरह पिछले कुछ वर्षों में लैब-ग्रोन डायमंड्स (LGD) ने प्राकृतिक हीरों की कीमतों को 80 से 90 फीसदी तक गिरा दिया था, क्या अब सोने की कीमतें भी उसी तरह धड़ाम होने वाली हैं।

क्या है न्यूक्लियर ट्रांसम्यूटेशन और कैसे बनता है यह सोना

वैज्ञानिक दृष्टि से किसी एक तत्व को दूसरे तत्व में बदलना असंभव नहीं है, लेकिन यह कोई रासायनिक प्रक्रिया नहीं बल्कि शुद्ध रूप से परमाणु भौतिकी का खेल है। मैराथन फ्यूजन के अनुसार, वे ड्यूटेरियम-ट्रिटियम फ्यूजन रिएक्शन से उत्पन्न होने वाले हाई-एनर्जी न्यूट्रॉन्स का उपयोग करके मरकरी-198 को मरकरी-197 में बदलते हैं, जो रेडियोएक्टिव क्षय (Decay) के बाद अंततः स्थिर सोने-197 में परिवर्तित हो जाता है। भौतिकी के नियमों के अनुसार यह संभव है और सर्न की लार्ज हैड्रॉन कोलाइडर प्रयोगशाला में लेड के टकराव से कुछ पिकोग्राम सोने के नाभिक पहले भी बनाए जा चुके हैं, हालांकि वे सेकंड के अरबवें हिस्से में ही नष्ट हो गए थे। स्टार्टअप का दावा है कि वह इस तकनीक का उपयोग भविष्य में बड़े पैमाने पर उत्पादन के लिए करने का रास्ता खोज रहा है।

क्या हीरे की तरह लैब में सोना बनाना आसान और सस्ता है

अक्सर लोग हीरे और सोने की तुलना एक जैसी समझ लेते हैं, लेकिन दोनों की संरचना और निर्माण में जमीन-आसमान का अंतर है।

  • हीरा केवल एक रासायनिक यौगिक (कार्बन) है: प्राकृतिक हीरा केवल कार्बन का एक रूप (क्रिस्टल लैटिस) होता है। लैब में उच्च तापमान और भारी दबाव (HPHT या CVD तकनीक) देकर कार्बन को आसानी से हीरे में बदला जा सकता है। इसमें किसी परमाणु के नाभिक को बदलने की जरूरत नहीं पड़ती, यही वजह है कि लैब-ग्रोन हीरे आज बहुत कम लागत में फैक्ट्रियों में भारी मात्रा में उगाए जा रहे हैं।

  • सोना एक स्वतंत्र मौलिक तत्व (Element) है: सोना (Au) किसी अन्य पदार्थ का मिश्रण नहीं बल्कि एक बुनियादी तत्व है जिसका एटॉमिक नंबर 79 है। सोने का एक भी परमाणु बनाने के लिए किसी दूसरे तत्व के न्यूक्लियस से प्रोटॉन या न्यूट्रॉन को निकालना या जोड़ना पड़ता है, जिसके लिए महाकाय परमाणु रिएक्टरों और भारी ऊर्जा की जरूरत होती है। ब्रह्मांड में यह प्रक्रिया केवल न्यूट्रॉन तारों की भीषण टक्कर (किलोनोवा) के दौरान ही अरबों डिग्री तापमान पर प्राकृतिक रूप से घटती है।

लैब वाले सोने के सामने खड़ी हैं तीन सबसे बड़ी तकनीकी व व्यावहारिक चुनौतियां

वैज्ञानिकों और कमोडिटी विश्लेषकों का स्पष्ट मानना है कि इस तकनीक का व्यावसायिक रूप से बाजार में आना वर्तमान में लगभग असंभव सा दिखता है।

  • रेडियोधर्मिता का गंभीर खतरा: न्यूक्लियर प्रक्रिया से निकलने वाला सोना तुरंत शुद्ध या सुरक्षित नहीं होता। कंपनी के शोध पत्र के अनुसार, इस सोने में रेडियोएक्टिव आइसोटोप्स मौजूद रहते हैं, जिन्हें पूरी तरह सुरक्षित होने के लिए लगभग 7 से 17 साल तक स्टोर करके रखना पड़ेगा, जिसके बाद ही कोई इसे छू या पहन सकता है।

  • आसमान छूती उत्पादन लागत: एक ग्राम सोना ट्रांसम्यूटेशन तकनीक से बनाने में जितना खर्च, बिजली और एडवांस रिएक्टर तकनीक लगेगी, वह जमीन से सोना खोदने की वर्तमान लागत से सैकड़ों गुना अधिक महंगी है।

  • उत्पादन की नगण्य क्षमता: कंपनी का खुद का 2025 का एक सैद्धांतिक अनुमान कहता है कि यदि 1 गीगावाट का विशालकाय थर्मल फ्यूजन प्लांट लगाया जाए, तो भी सालभर में केवल 2 टन सोना बन पाएगा। जबकि वर्तमान में दुनिया भर की खदानों से हर साल 3,600 टन से अधिक प्राकृतिक सोना निकाला जाता है।

क्या सोने की कीमतों पर पड़ेगा कोई असर

आर्थिक और बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, इस खबर से सोने की कीमतों में गिरावट आने की कोई संभावना नहीं है। सोना केवल आभूषणों का माध्यम नहीं है, बल्कि यह दुनिया भर के केंद्रीय बैंकों (जैसे आरबीआई, यूएस फेडरल रिजर्व) की मौद्रिक प्रणाली का प्रमुख रिजर्व एसेट (गोल्ड रिजर्व) है। जब तक कोई तकनीक व्यावसायिक रूप से खनन से सस्ती साबित नहीं होती, तब तक इसका गोल्ड मार्केट पर शून्य प्रभाव रहेगा। वर्तमान में सोने की कीमतों में होने वाले उतार-चढ़ाव पूरी तरह से वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव, डॉलर इंडेक्स, ब्याज दरों और महंगाई के आंकड़ों पर निर्भर करते हैं, न कि किसी लैब में परमाणु स्तर पर बने कुछ माइक्रोग्राम सोने के दावों पर।