'न्यूज चैनल वालों से बात की क्या?'; राहुल गांधी के खिलाफ याचिका पर भड़के CJI सूर्यकांत

'न्यूज चैनल वालों से बात की क्या?'; राहुल गांधी के खिलाफ याचिका पर भड़के CJI सूर्यकांत

सुप्रीम कोर्ट में मंगलवार को उस वक्त दिलचस्प और तनावपूर्ण स्थिति पैदा हो गई, जब लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति से जुड़ी एक लंबित याचिका का उल्लेख (Mentioning) करते हुए जल्द सुनवाई की गुहार लगाई गई। भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ के समक्ष जैसे ही वकील ने इस मामले को उठाया, सीजेआई ने याचिका की मंशा और समय पर तीखी नाराजगी जताई।

वकील ने अदालत में दलील दी कि राहुल गांधी ने हाल ही में सार्वजनिक मंच से कथित तौर पर यह बयान दिया है कि वह प्रवर्तन निदेशालय (ED) और केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) के करीब 200 अधिकारियों के संपर्क में हैं, इसलिए मामले में तुरंत हस्तक्षेप जरूरी है।

'न सिर है, न पैर... क्या न्यूज बनाने की बात हुई है?'

वकील की दलील सुनते ही सीजेआई सूर्यकांत भड़क गए और उन्होंने प्रचार पाने के लिए किए जाने वाले ऐसे मेंशनिंग पर कड़ा ऐतराज जताया। पीठ ने सख्त लहजे में टिप्पणी करते हुए कहा—

"इस आवेदन का न कोई सिर है और न ही कोई पैर। क्या इसके लिए किसी न्यूज चैनल वालों से बात की है? क्या केवल खबर (News) बनाने के लिए यह सब किया जा रहा है? यह किस तरह का आवेदन है?"

सीजेआई की इस तीखी टिप्पणी के बाद अदालत कक्ष में सन्नाटा पसर गया और संबंधित वकील को अपनी बात बीच में ही रोकनी पड़ी।

मेंशनिंग के दौरान लाइव स्ट्रीमिंग बंद करने का मौखिक आदेश

अदालत कक्ष में केवल सस्ती लोकप्रियता और मीडिया की सुर्खियां बटोरने के लिए मामलों को उछालने की प्रवृत्ति पर अंकुश लगाने के लिए सीजेआई सूर्यकांत ने एक बड़ा कदम उठाया। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट की रजिस्ट्री और तकनीकी कर्मचारियों को मौके पर ही मौखिक निर्देश दिया कि—

  • भविष्य में जब भी मामलों के त्वरित उल्लेख (Mentioning Hours) की प्रक्रिया चले, उस दौरान अदालती कार्यवाही की लाइव स्ट्रीमिंग (Live Streaming) और रिकॉर्डिंग तुरंत बंद कर दी जाए।

  • सीजेआई ने स्पष्ट कहा कि कैमरों की मौजूदगी का फायदा उठाकर अदालत के समय का दुरुपयोग करने की अनुमति नहीं दी जा सकती।

क्या है यह मूल मामला?

यह मामला मूल रूप से कर्नाटक के भाजपा कार्यकर्ता एस. विग्नेश शिशिर द्वारा दायर एक याचिका से संबंधित है। याचिकाकर्ता ने आरोप लगाया था कि राहुल गांधी और उनके परिवार के पास ज्ञात स्रोतों से अधिक संपत्ति है और इसकी जांच केंद्रीय जांच एजेंसियों से कराई जाए।

यह मामला जब इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ में पहुंचा था, तो हाईकोर्ट के कुछ निर्देशों के खिलाफ राहुल गांधी की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने सुप्रीम कोर्ट में अपील की थी। अगस्त 2026 में सीजेआई सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ ने मामले में दखल देते हुए हाईकोर्ट की आगे की कार्यवाही पर रोक लगा दी थी और जांच एजेंसियों को कोई भी अंतिम रिपोर्ट देने से रोका था। सुप्रीम कोर्ट ने उस समय टिप्पणी की थी कि बिना दूसरे पक्ष को सुने कोई प्रतिकूल निर्देश जारी करना प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के विपरीत है। इसी स्थगनादेश के बीच मंगलवार को नए सिरे से मामले को उछालने की कोशिश पर अदालत का गुस्सा फूटा।