मेरठ नीला ड्रम मर्डर केस: फांसी के खिलाफ मुस्कान और साहिल की अपील हाईकोर्ट में मंजूर

मेरठ नीला ड्रम मर्डर केस: फांसी के खिलाफ मुस्कान और साहिल की अपील हाईकोर्ट में मंजूर

उत्तर प्रदेश के मेरठ जिले के सनसनीखेज 'नीला ड्रम हत्याकांड' में मृत्युदंड की सजा पाए दोषियों मुस्कान रस्तोगी और साहिल शुक्ला को इलाहाबाद हाईकोर्ट से कानूनी प्रक्रिया के तहत पहली राहत मिली है। हाईकोर्ट ने मेरठ की जिला एवं सत्र अदालत द्वारा सुनाई गई फांसी की सजा और दोषसिद्धि के खिलाफ दोनों की ओर से दाखिल आपराधिक अपील को सुनवाई के लिए औपचारिक रूप से स्वीकार (Admit) कर लिया है। इसके साथ ही उच्च न्यायालय ने ट्रायल कोर्ट से मामले की पूरी केस डायरी और न्यायिक पत्रावली तलब की है। कोर्ट ने मामले की अगली विस्तृत सुनवाई के लिए 30 नवंबर की तारीख तय की है।

मेरठ सत्र अदालत ने 14 अक्टूबर को सुनाई थी फांसी की सजा

ब्रह्मपुरी थाना क्षेत्र में हुए इस जघन्य हत्याकांड में ट्रायल कोर्ट ने 30 सितंबर को दोनों आरोपियों को हत्या (भारतीय न्याय संहिता) और साक्ष्य नष्ट करने की धाराओं में दोषी करार दिया था। इसके बाद 14 अक्टूबर को मेरठ की अदालत ने अपराध को 'दुर्लभ से दुर्लभतम' (Rarest of Rare) श्रेणी का मानते हुए मुस्कान रस्तोगी और उसके प्रेमी साहिल शुक्ला को फांसी की सजा सुनाई थी, साथ ही दोनों पर ₹50,000-₹50,000 का जुर्माना भी लगाया था। इसी फैसले को चुनौती देते हुए दोनों ने हाईकोर्ट में साझा अपील दाखिल कर दोषसिद्धि को रद्द करने और बरी किए जाने की मांग की है।

अपील में बचाव पक्ष की दलीलें: 'केस केवल परिस्थितियों पर आधारित'

हाईकोर्ट में दायर अपील में बचाव पक्ष के वकीलों ने निचली अदालत के फैसले को मनमाना और कानूनी सिद्धांतों के विपरीत बताया है। अपील में मुख्य रूप से निम्नलिखित बिंदु उठाए गए हैं:

  • संदेह से परे साबित नहीं: अभियोजन पक्ष पूरे मामले को उचित संदेह से परे साबित करने में पूरी तरह विफल रहा है और फैसला केवल अनुमानों और अटकलों पर आधारित है।

  • गवाहों के बयानों में विरोधाभास: जिस चाकू, सीमेंट और नीले प्लास्टिक के ड्रम की खरीद का दावा पुलिस ने किया, उसकी पुष्टि के लिए न तो कोई सीसीटीवी फुटेज पेश की गई और न ही अधिकृत बिल या रसीदें।

  • बरामदगी पर सवाल: जब्ती और बरामदगी मेमो पर स्वतंत्र गवाहों के हस्ताक्षर न होने और इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों से जुड़े जरूरी प्रमाण पत्रों (Section 65B) की कमी की ओर भी ध्यान दिलाया गया है।

क्या था मेरठ का चर्चित 'नीला ड्रम' हत्याकांड?

यह वारदात मार्च 2025 की है। लंदन से लौटे सौरभ राजपूत की उसकी पत्नी मुस्कान रस्तोगी ने अपने प्रेमी साहिल शुक्ला के साथ मिलकर हत्या कर दी थी। आरोप के मुताबिक, सौरभ को पहले खाने में नशीला पदार्थ देकर अचेत किया गया और फिर चाकू से वार कर मार डाला गया। साक्ष्य छुपाने के लिए शव के टुकड़े कर एक नीले प्लास्टिक के ड्रम में भरे गए और ऊपर से सीमेंट-कंक्रीट का घोल डाल दिया गया। मामले को छिपाने के लिए मुस्कान कई दिनों तक सोशल मीडिया पर पुरानी तस्वीरें पोस्ट कर खुद के बाहर घूमने का नाटक करती रही। बदबू आने और सौरभ के भाई के शक करने के बाद पुलिस ने घर से ड्रम बरामद कर पूरे हत्याकांड का पर्दाफाश किया था।

कानूनी प्रक्रिया: डेथ रेफरेंस और अपील पर अब हाईकोर्ट की नजर

भारतीय आपराधिक कानून के तहत किसी भी निचली अदालत द्वारा दी गई फांसी की सजा तब तक अमल में नहीं लाई जा सकती जब तक संबंधित हाईकोर्ट उस पर अपनी मुहर (Confirmation) न लगा दे। ऐसे मामलों में 'डेथ रेफरेंस' और दोषियों की 'क्रिमिनल अपील' की सुनवाई एक साथ की जाती है। हालांकि अपील स्वीकार होने का मतलब सजा रद्द होना नहीं है, बल्कि अब हाईकोर्ट पूरे साक्ष्यों का नए सिरे से न्यायिक परीक्षण करेगा। 30 नवंबर को होने वाली सुनवाई पर पूरे प्रदेश की कानूनी निगाहें टिकी रहेंगी।