करवा चौथ पर पीरियड्स आ जाएं तो व्रत रखें या नहीं? जानिए 16 श्रृंगार, कथा और पूजन से जुड़े शास्त्रीय नियम

करवा चौथ पर पीरियड्स आ जाएं तो व्रत रखें या नहीं? जानिए 16 श्रृंगार, कथा और पूजन से जुड़े शास्त्रीय नियम

सनातन धर्म में करवा चौथ का व्रत सुहागिन महिलाओं के लिए अखंड सौभाग्य, पति की लंबी आयु और दांपत्य जीवन में अटूट प्रेम का सबसे बड़ा प्रतीक माना जाता है। कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि पर रखे जाने वाले इस निर्जला व्रत की तैयारियां महिलाएं हफ्तों पहले से शुरू कर देती हैं। हाथों में मेहंदी रचाने से लेकर सोलह श्रृंगार की खरीदारी तक हर चीज बड़े उत्साह से की जाती है। लेकिन कई बार ऐन करवा चौथ के दिन या व्रत से एक दिन पहले अचानक मासिक धर्म यानी पीरियड्स शुरू हो जाते हैं। ऐसी स्थिति में महिलाओं के मन में भारी असमंजस और चिंता पैदा हो जाती है कि क्या इस अवस्था में व्रत रखा जा सकता है, क्या सोलह श्रृंगार करना वर्जित हो जाता है, और भगवान शिव, माता पार्वती व चंद्र देव की पूजा और अर्घ्य कैसे संपन्न किया जाए। शास्त्रों में इस स्थिति को लेकर बेहद स्पष्ट, व्यावहारिक और मर्यादापूर्ण नियम बताए गए हैं ताकि किसी भी सुहागिन का व्रत खंडित न हो।

क्या पीरियड्स में करवा चौथ का व्रत रखना चाहिए अथवा छोड़ देना चाहिए

हिंदू धर्मशास्त्रों और स्मृतियों के अनुसार मासिक धर्म एक स्वाभाविक और प्राकृतिक शारीरिक प्रक्रिया है, जो किसी भी प्रकार से आपके मानसिक संकल्प या भक्ति को अशुद्ध नहीं करती। यदि आपने करवा चौथ का व्रत रखने का संकल्प पहले से ले रखा है या आप हर वर्ष नियमपूर्वक यह व्रत करती आ रही हैं, तो पीरियड्स आने पर भी व्रत को बीच में छोड़ने या तोड़ने की आवश्यकता बिल्कुल नहीं होती। शास्त्रों का स्पष्ट मत है कि यदि कोई महिला स्वस्थ है और बिना जल-अन्न के पूरा दिन उपवास रखने में शारीरिक रूप से सक्षम है, तो उसे पूरे विधि-विधान से निर्जला व्रत अवश्य रखना चाहिए। व्रत का संबंध आत्मा के संकल्प, निष्ठा और पति के प्रति मंगलकामना से होता है, इसलिए पीरियड्स की स्थिति में भी उपवास पूरी श्रद्धा के साथ रखा जाता है और इससे व्रत का पूर्ण फल प्राप्त होता है।

सोलह श्रृंगार और मेहंदी लगाने को लेकर क्या कहते हैं धार्मिक नियम

करवा चौथ के दिन सुहागिनों के लिए सोलह श्रृंगार का विशेष महत्व होता है, क्योंकि यह दिन देवी पार्वती और अखंड सौभाग्य की आराधना का पर्व है। मासिक धर्म के दौरान भी महिलाएं नए और स्वच्छ वस्त्र पहन सकती हैं तथा पूर्ण रूप से सोलह श्रृंगार कर सकती हैं। हाथों में मेहंदी लगाना, मांग में सिंदूर भरना, माथे पर बिंदी लगाना, चूड़ियां और पायल पहनना पूरी तरह से शास्त्रसम्मत और मान्य है। श्रृंगार नारी के सुहाग का प्रतीक है और इसमें किसी प्रकार की धार्मिक मनाही नहीं होती। केवल इतना ध्यान रखना चाहिए कि सुबह स्नान करने के पश्चात पूरी तरह धुले और शुद्ध वस्त्र ही धारण करें। काले, गहरे नीले या सफेद रंग के वस्त्र पहनने से बचना चाहिए और शुभता के प्रतीक लाल, गुलाबी, पीले या नारंगी रंगों के परिधान ही चुनने चाहिए।

पीरियड्स के दौरान करवा चौथ पूजन और कथा श्रवण की सही विधि

मासिक धर्म के दौरान शारीरिक शुद्धि के कुछ नियमों का पालन करना अनिवार्य माना गया है, ताकि देव प्रतिमाओं और पूजा सामग्री की पवित्रता अक्षुण्ण बनी रहे। इस अवस्था में महिला को स्वयं सीधे तौर पर मंदिर के गर्भगृह में प्रवेश नहीं करना चाहिए और न ही देवी-देवताओं की मूर्तियों, तस्वीरों या पूजा के कलश और करवा को स्पर्श करना चाहिए। शाम के समय जब करवा चौथ की चौकी सजाई जाए, तो उस स्थान से थोड़ी दूरी बनाकर एक अलग आसन पर बैठें। परिवार की कोई अन्य सुहागिन महिला—जैसे सास, जेठानी, देवरानी या ननद—आपकी ओर से करवा चौथ की मुख्य पूजा संपन्न कर सकती हैं। आप दूर बैठकर पूरी श्रद्धा से करवा चौथ की व्रत कथा ध्यानपूर्वक सुनें और मन ही मन माता गौरी और भगवान शिव का स्मरण करती रहें। दूसरों द्वारा थाली फेरने की रस्म में भी आप शारीरिक दूरी बनाए रखते हुए सम्मिलित हो सकती हैं और कथा समाप्त होने पर माता करवा को प्रणाम कर सकती हैं।

चंद्र देव को अर्घ्य देने और व्रत खोलने का शास्त्रीय तरीका

करवा चौथ का व्रत रात्रि में चंद्रमा के दर्शन और अर्घ्य देने के पश्चात ही पूर्ण माना जाता है। पीरियड्स की स्थिति में स्वयं अपने हाथों से जल का लोटा लेकर सीधे चंद्र देव को अर्घ्य अर्पित नहीं करना चाहिए। इसके बजाय आप अपने पति या परिवार के किसी अन्य सदस्य से चंद्र देव को अर्घ्य दिलवा सकती हैं। आप थोड़ी दूरी पर खड़े होकर छलनी से चंद्रमा के दर्शन करें और फिर उसी छलनी से अपने पति का चेहरा देखें। इसके बाद पति के हाथों से जल ग्रहण करके अपना निर्जला उपवास खोलें। व्रत खोलने के उपरांत अपनी सास या परिवार की किसी वरिष्ठ महिला को सुहाग की पिटारी और बायना किसी अन्य व्यक्ति के जरिए स्पर्श कराकर भेंट करें और उनके चरण स्पर्श कर अखंड सौभाग्यवती होने का आशीर्वाद प्राप्त करें।